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भोपाल : भोपाल रियासत उत्तराधिकार विवाद: हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का 2000 का आदेश रद्द किया, एक साल में दोबारा सुनवाई के निर्देश

admin Thu, Jul 3, 2025

भोपाल रियासत की अंतिम नवाबी संपत्ति को लेकर चल रहे उत्तराधिकार विवाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट की जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने भोपाल जिला अदालत द्वारा वर्ष 2000 में पारित आदेश को निरस्त कर दिया है और मामले की नए सिरे से सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं।


🔹 क्या है पूरा मामला?

भोपाल रियासत के अंतिम नवाब मोहम्मद हमीदुल्ला खान का 4 फरवरी 1960 को निधन हो गया था।

  • इससे पहले 30 अप्रैल 1949 को रियासत का भारत संघ में विलय हो चुका था।

  • विलय के समय एक लिखित समझौते में यह स्पष्ट किया गया था कि नवाब के विशेषाधिकार और निजी संपत्ति पर उनके उत्तराधिकारियों का अधिकार रहेगा।

  • यह अधिकार भोपाल सिंहासन उत्तराधिकार अधिनियम 1947 के तहत मान्य रहेगा।


🔹 ट्रायल कोर्ट का फैसला क्यों हुआ खारिज?

भोपाल जिला न्यायालय ने 2000 में उत्तराधिकार को लेकर जो आदेश पारित किया था, उसे रियासत के वंशजों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
इनमें शामिल थे:

  • बेगम सुरैया रशीद

  • बेगम मेहर ताज

  • नवाब साजिदा सुल्तान

  • नवाबजादी कमर ताज राबिया सुल्तान

  • नवाब मेहर ताज साजिदा सुल्तान

  • और अन्य पारिवारिक सदस्य

अपील में कहा गया कि ट्रायल कोर्ट ने भारत सरकार और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी करते हुए फैसला सुनाया था।


🔹 हाईकोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने माना कि:

  • संपत्ति उत्तराधिकार का मामला संवेदनशील और ऐतिहासिक महत्व का है।

  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार इस मामले में नए सिरे से सुनवाई जरूरी है।

  • कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सुनवाई 1 साल के भीतर पूरी की जाए

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