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FSSAI का बड़ा फैसला : कोई भी कंपनी नहीं कर सकती ‘100% नैचुरल’ या ‘शुद्ध’ होने का दावा, जानें नियम

Media Yodha Desk Mon, Aug 3, 2026

आप बाजार से जो देसी घी, शहद, नारियल पानी या मक्‍खन वगैरह '100% नैचुरल' या '100% शुद्ध' समझकर खरीद रहे हैं, क्‍या वो असल में उतना नैचुरल या शुद्ध है? शायद नहीं! कंपनियां चाहें कितना ही दावा कर ले, लेकिन कानूनन ऐसे दावे ही पूरी तरह से अवैध हैं. डाबर (Dabur) पर FSSAI की कार्रवाई के बारे में शायद आपने खबर पढ़ ली होगी! FSSAI ने डाबर को प्रॉडक्‍ट्स पर 100% शुद्ध, नैचुरल या ऑर्गेनिक का दावा करने को मना किया है. और बात केवल डाबर की ही नहीं है, फूड रेगुलेटर FSSAI किसी भी कंपनी को पैकेट पर '100% शुद्ध' या '100% प्राकृतिक' लिखने की इजाजत नहीं देता? आइए एक्‍सपर्ट्स से समझते हैं FSSAI के उस सख्त कानून (Advertising Regulations 2018) के बारे में, जो बड़े-बड़े ब्रैंड्स के विज्ञापनों की हवा निकाल सकता है.

क्‍या है FSSAI का विज्ञापन और दावा रेगुलेशन?

FSSAI के 'विज्ञापन और दावे विनियम, 2018' (Advertising and Claims Regulations, 2018) के तहत कोई भी कंपनी किसी भी पैकेज्ड फूड पर '100% नैचुरल' या '100% प्योर' शब्द का इस्तेमाल कानूनी रूप से नहीं कर सकती है. यूपी के एक शहर में ड्रग इंस्‍पेक्‍टर रह चुके अधिकारी के मुताबिक, FSSAI ने पहले भी स्पष्ट किया है कि ऐसे दावे (Absolute Claims) उपभोक्ताओं को पूरी तरह गुमराह करते हैं.

कानून में '100%' शब्द की कोई परिभाषा ही नहीं

FSSAI के आधिकारिक दिशा-निर्देशों के मुताबिक, फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 या 2018 के नियमों में '100%' शब्द को फूड आइटम्‍स यानी खाद्य पदार्थों के संदर्भ में परिभाषित ही नहीं किया गया है. जब कानून में इस शब्द की कोई परिभाषा या पैमाना नहीं है, तो कंपनियां इसका इस्तेमाल किसी उत्पाद को दूसरे से बेहतर या 'पूरी तरह शुद्ध' दिखाने के लिए एक 'ब्लैंकेट मार्केटिंग टूल' की तरह नहीं कर सकतीं.

रेगुलेशन 4(1): दावे स्पष्ट और अकाट्य होने चाहिए

रेगुलेशन 2018 की उप-धारा 4(1) स्पष्ट कहती है कि पैकेज्ड फूड पर किया गया कोई भी दावा सच्चा, स्पष्ट, अर्थपूर्ण और गैर-भ्रामक होना चाहिए. '100% नेचुरल' एक अस्पष्ट  टर्म है. किसी भी पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड को पूरी तरह प्राकृतिक नहीं माना जा सकता, क्योंकि पैकिंग, पाश्चुरीकरण (Pasteurization) या शेल्फ-लाइफ बढ़ाने की प्रक्रिया के दौरान उसमें कुछ न कुछ बदलाव जरूर होते हैं. इसलिए ये दावा आम तौर पर पहली नजर में ही भ्रामक माना जाता है.

कंपाउंड फूड पर तो कभी नहीं कर सकते दावा

जो फूड प्रोडक्‍ट्स एक से ज्‍यादा सामग्री (Ingredients) को मिलाकर बनते हैं या फिर जिन्हें प्रोसेस किया जाता है, उन्हें कंपाउंड फूड कहा जाता है. FSSAI के नियमों के तहत ऐसे कंपाउंड फूड आइटम्‍स पर '100% शुद्ध' होने का दावा करना पूरी तरह गैर-कानूनी है. जैसे कि पैकेज्ड नारियल पानी या कोकोनट मिल्क में यदि स्टेबलाइजर या पानी भी मिलाया गया है, तो वह '100% नैचुरल' की कैटगरी से ऑटोमैटिकली बाहर हो जाता है.

वैज्ञानिक और कानूनी सत्यापन भी संभव नहीं

नियमों के मुताबिक, यदि कोई ब्रैंड अपने प्रॉडक्‍ट्स की किसी खूबी को लेकर कोई दावा करता है, तो उसके पास वैज्ञानिक प्रमाण और लैब टेस्टिंग की रिपोर्ट होनी चाहिए. लैब के स्तर पर भी किसी भी प्रोसेस्ड फूड की '100% नैचुरलिटी' को प्रमाणित करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है. अधिकारी ने बताया कि कंपनियां बिना किसी ठोस वैज्ञानिक आधार के केवल ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए इन शब्दों का उपयोग करती हैं, जो कि एक दंडनीय अपराध है.

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