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: कांकेर जिले के ग्रामीणों का जल संकट: स्वच्छ पानी के लिए जंगलों में जान जोखिम में डालने को मजबूर

admin Thu, Oct 24, 2024

कांकेर जिले के आंतरिक इलाकों के कई गांव आज भी स्वच्छ पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों को अपनी प्यास बुझाने के लिए जंगलों और पहाड़ों की दरारों से पानी निकालने पर मजबूर होना पड़ता है। इन गांवों में कई स्थानों पर हैंडपंपों से निकलने वाले पानी में अत्यधिक लोहे की मात्रा पाई जाती है, जिससे वह पीने योग्य नहीं होता। ऐसे में ग्रामीणों को प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है, जो उनकी प्यास बुझाने का एकमात्र साधन है।

लेकिन इन स्रोतों तक पहुंचने के लिए उन्हें अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है। खासकर महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुरुष लाठी लेकर जंगलों में उनके साथ चलते हैं। मार्काचुआ गांव में करीब 200 और बिजापारा गांव में लगभग 23 लोग रहते हैं। इन गांवों के लोग अपने दैनिक कार्यों के लिए कोटरी नदी के दूषित पानी पर निर्भर हैं। इस पानी की गुणवत्ता इतनी खराब है कि इसे पीने से कोई भी बीमार हो सकता है। फिर भी, ग्रामीण मजबूरी में इस गंदे पानी का उपयोग करने पर मजबूर हैं। हर दिन उन्हें इस पानी को पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। गांव की महिलाएं जंगल और पहाड़ों के कठिन रास्तों को पार कर पानी लाने जाती हैं। वे दर्जनों की संख्या में एक साथ नदी पर जाती हैं ताकि वे सुरक्षित रहें, क्योंकि यह पूरा इलाका जंगल और पहाड़ों से घिरा हुआ है, जहां भालू, सियार और अन्य जंगली जानवरों के हमले का हमेशा डर बना रहता है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुरुष लाठी लेकर उनके साथ चलते हैं ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

गांव में पानी की समस्या इतनी गंभीर है कि ग्रामीण जंगल से पत्तों को तोड़कर उनसे पत्तल बनाते हैं और इन्हीं में खाना खाते हैं, ताकि उन्हें बर्तन साफ ​​न करने पड़ें। ग्रामीणों ने कई बार स्वच्छ पानी की मांग की है, वे हर उस दरवाजे पर गए हैं जहां से उन्हें उम्मीद थी, लेकिन अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।

स्थानीय प्रशासन ने मामले को संज्ञान में लिया है और जल्द ही समाधान की बात कही है, लेकिन यह समस्या कब तक हल होगी, यह कहना मुश्किल है। केंद्र और राज्य सरकारें ग्रामीण और शहरी इलाकों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का दावा करती हैं। नल जल योजना समेत अन्य योजनाओं के माध्यम से जल आपूर्ति की बात की जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह योजना असफल होती दिख रही है। इसका उदाहरण कांकेर जिले के ग्राम पंचायत मंडागांव के मार्काचुआ और बिजापारा गांव हैं, जहां के ग्रामीण आज भी स्वच्छ और शुद्ध पेयजल के लिए तरस रहे हैं।  

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