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Chhattisgarh High Court : नो वर्क, नो पे’ हर मामले में स्वतः नहीं होता लागू, हाईकोर्ट ने रिटायर्ड अधिकारी के पक्ष में सुनाया अहम निर्णय

Media Yodha Desk Sat, Jun 13, 2026

Chhattisgarh High Court - हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि नो वर्क, नो पे का सिद्धांत हर मामले में स्वतः लागू नहीं होता. यदि किसी कर्मचारी को विभागीय लापरवाही या प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण पदोन्नति का लाभ समय पर नहीं मिल पाता, तो उसे पूरी तरह वेतन लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने यह फैसला सेवानिवृत्त सहायक आयुक्त जी आर साहू द्वारा दायर याचिका पर सुनाया. याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि, वरिष्ठ होने के बावजूद उन्हें समय पर डिप्टी कमिश्नर पद पर पदोन्नति नहीं दी गई, जबकि उनके जूनियर अधिकारियों को वर्ष 2011 में ही पदोन्नत कर दिया गया था. मामले की सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि विभागीय समीक्षा पदोन्नति समिति (रिव्यू डीपीसी) ने याचिकाकर्ता को प्रमोशन के लिए उपयुक्त पाया था और उन्हें उनके जूनियर अधिकारियों से ऊपर रखने की अनुशंसा भी की थी. इसके बावजूद विभाग ने लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं की. याचिकाकर्ता ने कई बार प्रतिवेदन दिए और न्यायालय की शरण भी ली, लेकिन समय पर पदोन्नति नहीं मिल सकी.

मामले में मुख्य विवाद यह था कि 13 जुलाई 2011 से 31 दिसंबर 2016 (सेवानिवृत्ति तिथि) तक की अवधि के लिए याचिकाकर्ता को पदोन्नत पद का वेतन लाभ दिया जाए या नहीं. राज्य सरकार ने “नो वर्क, नो पे” का सिद्धांत लागू करने का तर्क दिया, जबकि याचिकाकर्ता का कहना था कि उन्हें विभाग की गलती के कारण पदोन्नत पद पर कार्य करने का अवसर ही नहीं मिला. न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता पदोन्नत पद पर कार्य नहीं कर पाए, लेकिन इसके वे स्वयं जिम्मेदार नहीं थे. विभागीय निष्क्रियता के कारण उन्हें पदोन्नति से वंचित रखा गया. ऐसे मामलों में नो वर्क, नो पे का सिद्धांत यांत्रिक रूप से लागू नहीं किया जा सकता.

हालांकि न्यायालय ने यह भी माना कि, याचिकाकर्ता ने वास्तव में डिप्टी कमिश्नर के पद पर कार्य नहीं किया था. इसलिए न्यायसंगत संतुलन बनाते हुए अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह 13 जुलाई 2011 से 31 दिसंबर 2016 तक डिप्टी कमिश्नर और सहायक आयुक्त के वेतन के अंतर की राशि का 50 प्रतिशत एरियर्स चार माह के भीतर दे. निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा.

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