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Jhiram Ghati Martyrs : झीरम घाटी शहीद स्मारक में अब QR कोड से मिलेगी बलिदानियों की पूरी जानकारी, डॉक्यूमेंट्री भी देख सकेंगे लोग

Media Yodha Desk Thu, Sep 24, 2026

Jhiram Ghati Martyrs: झीरम घाटी शहीद स्मारक में अब बलिदानियों से जुड़ी जानकारी डिजिटल माध्यम से भी उपलब्ध होगी। स्मारक पहुंचने वाले लोग अपने मोबाइल फोन से QR कोड स्कैन कर संबंधित बलिदानी के जीवन, सेवा और बलिदान से जुड़ी विस्तृत जानकारी हासिल कर सकेंगे। इसके लिए प्रत्येक बलिदानी की नाम पट्टिका के पास अलग-अलग QR कोड लगाए गए हैं।

QR कोड स्कैन करने पर संबंधित बलिदानी का नाम, तस्वीर, सेवा से जुड़ी जानकारी, बलिदान की तारीख और झीरम घटना से संबंधित विवरण मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई देगा। इससे स्मारक आने वाले लोगों को वहां दर्ज नामों के बारे में विस्तार से जानने का अवसर मिलेगा।

डॉक्यूमेंट्री और ऑडियो-वीडियो की सुविधा

स्मारक में केवल बलिदानियों की व्यक्तिगत जानकारी ही नहीं, बल्कि झीरम घटना से जुड़ी डिजिटल सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है। मुख्य QR कोड को स्कैन करने पर झीरम घटना पर आधारित डॉक्यूमेंट्री देखी जा सकेगी।

वहीं, अलग-अलग नाम पट्टिकाओं पर लगाए गए QR कोड के माध्यम से संबंधित बलिदानी की तस्वीर और उनके जीवन व बलिदान से जुड़ी जानकारी ऑडियो-वीडियो के जरिए देखी और सुनी जा सकेगी। इससे स्मारक पहुंचने वाले युवा और विद्यार्थी डिजिटल माध्यम से घटना के बारे में जानकारी हासिल कर सकेंगे।

25 मई 2013 को हुआ था माओवादी हमला

25 मई 2013 को झीरम घाटी में सुकमा से लौट रही कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर माओवादी हमला हुआ था। इस घटना में तत्कालीन पीसीसी अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके पुत्र दिनेश पटेल, पूर्व मंत्री महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत कई राजनीतिक नेताओं, सुरक्षा बल के जवानों और अन्य लोगों की मौत हुई थी। घटना में कुल 32 लोगों के बलिदान की जानकारी दी गई है।

बलिदानियों की स्मृति को संरक्षित रखने के लिए झीरम घाटी के अलावा जगदलपुर के लालबाग में भी स्मारक बनाए गए हैं। अब इन स्मारकों में डिजिटल तकनीक को जोड़कर लोगों को घटना और बलिदानियों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

अगस्त में दौरे के बाद शुरू हुआ डिजिटलीकरण

अगस्त 2026 में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने शहीद स्मारक का दौरा किया था। इस दौरान स्मारक को और अधिक प्रभावी एवं स्मरणीय बनाने की दिशा में काम करने की बात कही गई थी। इसके बाद प्रशासन की ओर से स्मारक के डिजिटलीकरण पर काम शुरू किया गया।

QR कोड की सुविधा शुरू होने से स्मारक पहुंचने वाले पर्यटकों, स्कूली विद्यार्थियों और युवाओं को झीरम घाटी की घटना और इसमें बलिदान हुए लोगों के बारे में जानकारी प्राप्त करने में आसानी होगी। मोबाइल के जरिए जानकारी उपलब्ध होने से स्मारक से जुड़ी सामग्री अब डिजिटल माध्यम से भी लोगों तक पहुंच सकेगी।

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