25th October 2026

BREAKING NEWS

माही ने खुद दिया बड़ा अपडेट, साल के अंत में आ सकती है बड़ी खबर!

त्योहारी सीजन में PM मोदी का ‘वोकल फॉर लोकल’ पर जोर, बोले- दुनिया के बाजारों तक पहुंच रहे भारतीय उत्पाद

दर्दनाक हादसे में महिला की मौत, युवक और दो बच्चे घायल

भाजपा प्रदेश कार्यालय में CM विष्णुदेव साय ने किया स्वागत; आज होंगी कई अहम बैठकें

ठंड के साथ बारिश की संभावना; जानें ताजा अपडेट

Advertisment

छत्तीसगढ़ सरकार का दिवाली गिफ्ट : मांझियों और चालकियों के मानदेय में बढ़ोतरी, अब मिलेगी इतनी राशि

Media Yodha Desk Sun, Oct 25, 2026

रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार ने दीपावली से पहले बस्तर के पारंपरिक जनजातीय नेतृत्व को बड़ी सौगात दी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बस्तर में आयोजित पारंपरिक मुरिया दरबार के मंच से मांझियों और चालकियों के मासिक मानदेय में बढ़ोतरी की घोषणा की। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी मौजूद थीं।

सरकार के इस फैसले से बस्तर की पारंपरिक सामाजिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े लोगों को आर्थिक राहत मिलेगी। नई घोषणा के अनुसार, मांझियों को अब हर महीने 2,000 रुपये के बजाय 5,000 रुपये मानदेय मिलेगा। वहीं, चालकियों का मासिक मानदेय 1,500 रुपये से बढ़ाकर 3,500 रुपये कर दिया गया है।

मांझियों के मानदेय में 3,000 रुपये की बढ़ोतरी

बस्तर की पारंपरिक व्यवस्था में मांझियों की अहम भूमिका होती है। वे सामाजिक मामलों के समाधान, सामुदायिक समन्वय और स्थानीय परंपराओं को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। सरकार के फैसले से उनके मासिक मानदेय में 3,000 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इससे उन्हें अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन में आर्थिक सहायता मिलेगी।

चालकियों को अब हर महीने मिलेंगे 3,500 रुपये

मांझियों के साथ पारंपरिक व्यवस्था में सहयोग करने वाले चालकियों के मानदेय में भी इजाफा किया गया है। पहले उन्हें प्रतिमाह 1,500 रुपये मिलते थे, जिसे बढ़ाकर अब 3,500 रुपये कर दिया गया है। इस तरह उनके मासिक मानदेय में 2,000 रुपये की वृद्धि हुई है।

जनजातीय परंपराओं के संरक्षण पर जोर

मुरिया दरबार बस्तर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां पारंपरिक जनजातीय व्यवस्था से जुड़े प्रतिनिधि सामुदायिक मुद्दों और क्षेत्र की परंपराओं से संबंधित विषयों पर अपनी बात रखते हैं। मांझियों और चालकियों के मानदेय में बढ़ोतरी को जनजातीय नेतृत्व को आर्थिक संबल देने और बस्तर की पारंपरिक व्यवस्था के सम्मान की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

विज्ञापन

जरूरी खबरें

विज्ञापन