प्रयागराज महाकुंभ 2025 : किन्नर अखाड़े में कलह, महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और ममता कुलकर्णी निष्कासित
Fri, Jan 31, 2025
प्रयागराज महाकुंभ के 19वें दिन बड़ा विवाद सामने आया है। किन्नर अखाड़े में आंतरिक कलह के चलते अखाड़े ने आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और महामंडलेश्वर ममता कुलकर्णी को निष्कासित कर दिया है। इस फैसले से अखाड़े में गहमागहमी बढ़ गई है।
किन्नर अखाड़े में विवाद की वजह?
सूत्रों के मुताबिक, अखाड़े में कई महीनों से नेतृत्व और संगठन को लेकर मतभेद चल रहे थे। कई वरिष्ठ संतों ने लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और ममता कुलकर्णी के कार्यों पर आपत्ति जताई थी।
किन्नर अखाड़े का फैसला
अखाड़े के वरिष्ठ संतों की बैठक के बाद दोनों को पद से हटाने का फैसला लिया गया। अखाड़े के प्रवक्ता ने कहा,
"यह निर्णय अखाड़े की एकता और अनुशासन बनाए रखने के लिए लिया गया है। जो भी अखाड़े की मर्यादा और परंपराओं का उल्लंघन करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।"
लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी की प्रतिक्रिया
निष्कासन के बाद लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा,
"यह राजनीति का नतीजा है। मुझे साजिश के तहत बाहर किया गया है, लेकिन मैं सनातन धर्म और किन्नर समाज की सेवा जारी रखूंगी।"
महाकुंभ में असर
इस विवाद का असर महाकुंभ के आयोजनों पर भी पड़ सकता है। किन्नर अखाड़े की पेशवाई और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में बदलाव संभव है।
किन्नर अखाड़ा: इतिहास और महत्व
किन्नर अखाड़ा 2015 में स्थापित हुआ था और 2019 के प्रयागराज कुंभ में पहली बार पेशवाई निकालकर सनातन परंपराओं में अपनी पहचान बनाई थी। अखाड़ा किन्नर समुदाय को धार्मिक और सामाजिक पहचान दिलाने के लिए कार्य करता है।
क्या आगे होगा?
निष्कासन के बाद अखाड़े की नई व्यवस्थाओं की घोषणा हो सकती है।
लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और ममता कुलकर्णी आगे क्या कदम उठाएंगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
किन्नर अखाड़े में नेतृत्व परिवर्तन के साथ नए संतों की घोषणा हो सकती है।
डिप्टी सीएम का बयान : छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम ने "समान नागरिक संहिता" लागू करने पर उत्तराखंड को दी बधाई
Tue, Jan 28, 2025
छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम ने उत्तराखंड सरकार को "समान नागरिक संहिता" (UCC) लागू करने पर शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने इसे समाज में समानता और न्याय स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया।
डिप्टी सीएम का बयान
डिप्टी सीएम ने कहा,
"उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होना पूरे देश के लिए प्रेरणा है। इससे समाज में समरसता और एकता को बढ़ावा मिलेगा। छत्तीसगढ़ भी हमेशा ऐसे कदमों का स्वागत करता है जो समाज के विकास और समानता के लिए महत्वपूर्ण हैं।"
उत्तराखंड ने किया UCC लागू
उत्तराखंड भारत का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने "समान नागरिक संहिता" को प्रभावी ढंग से लागू किया है। इस कानून का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून स्थापित करना है, चाहे उनका धर्म, जाति या लैंगिक पहचान कुछ भी हो।
UCC के प्रमुख पहलू
विवाह, तलाक और उत्तराधिकार से जुड़े कानूनों में समानता।
विभिन्न समुदायों के लिए समान कानूनी प्रावधान।
महिलाओं और कमजोर वर्गों के अधिकारों की सुरक्षा।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
सराहना
: कई राज्यों के नेताओं ने उत्तराखंड सरकार के इस कदम की तारीफ की है।
विवाद
: कुछ राजनीतिक दलों और धार्मिक संगठनों ने इसे लागू करने के तरीके पर सवाल उठाए हैं।
छत्तीसगढ़ का रुख
डिप्टी सीएम के बयान से यह स्पष्ट है कि राज्य सरकार सामाजिक समानता और एकता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, छत्तीसगढ़ में इसे लागू करने को लेकर फिलहाल कोई घोषणा नहीं हुई है।
समान नागरिक संहिता: एक राष्ट्रीय बहस
UCC को लेकर देशभर में बहस जारी है। इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत एक आदर्श के रूप में देखा जाता है। हालांकि, इसे लागू करने में विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक विविधताओं को ध्यान में रखना एक बड़ी चुनौती है।यह देखना दिलचस्प होगा कि उत्तराखंड की इस पहल का अन्य राज्यों पर क्या प्रभाव पड़ता है और UCC को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर क्या रुख अपनाया जाता है