वक्फ संशोधन : वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, केंद्र से मांगा जवाब, यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश
नई दिल्ली: वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 की वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान गुरुवार को कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस दौरान अदालत ने कई महत्वपूर्ण अंतरिम निर्देश भी जारी किए, जिनका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों की वर्तमान स्थिति को बनाए रखना और किसी भी प्रकार के प्रशासनिक बदलाव को रोकना है।
🔷 संपत्तियों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया, जिसमें कहा गया है कि अगली सुनवाई तक:
किसी भी वक्फ संपत्ति को डिनोटिफाई नहीं किया जाएगा
संपत्तियों के चरित्र में कोई बदलाव नहीं होगा
यह आदेश घोषित वक्फ संपत्तियों और 'वक्फ बाय यूजर' के रूप में दर्ज संपत्तियों पर भी लागू होगा
मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने स्पष्ट किया कि पंजीकृत वक्फ संपत्तियों की स्थिति को किसी भी रूप में प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।
🔷 वक्फ बोर्डों में कोई नई नियुक्ति नहीं होगी
केंद्र सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि अंतरिम अवधि में:
केंद्रीय वक्फ काउंसिल या राज्य वक्फ बोर्डों में कोई नई नियुक्ति नहीं की जाएगी
प्रशासनिक स्तर पर कोई परिवर्तन नहीं होगा, जिससे मौजूदा ढांचे की यथास्थिति बनी रहे
यह आश्वासन कोर्ट की उस चिंता के जवाब में आया, जिसमें कहा गया था कि जब मामला विचाराधीन हो, तब कोई निर्णय प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करना चाहिए।
🔷 गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति नहीं होगी: केंद्र का बयान
सुनवाई के दौरान केंद्र ने कोर्ट को सूचित किया कि वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति नहीं की जाएगी। यह बयान भी अदालत में दर्ज किया गया, जिससे संवेदनशीलता और सामाजिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में केंद्र की मंशा जाहिर हुई।
🔷 70 से अधिक याचिकाएं दायर, कोर्ट की निगरानी में मामला
वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में 70 से अधिक याचिकाएं दाखिल की गई हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट से अंतरिम राहत की मांग की थी। वहीं, केंद्र ने कैविएट दाखिल कर यह आग्रह किया कि किसी भी आदेश से पहले उसका पक्ष सुना जाए।
🔷 अगली सुनवाई में अहम फैसला संभव
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि अंतिम निर्णय तक कोई भी प्रशासनिक या कानूनी बदलाव नहीं होगा। अगली सुनवाई में इस मामले में संविधानिक वैधता पर केंद्र का पक्ष आने के बाद कई अहम पहलुओं पर न्यायालय की राय सामने आने की संभावना है।
विज्ञापन
जरूरी खबरें
विज्ञापन