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: बेटी को पढ़ाई के लिए माता-पिता से खर्च वसूलने का पूरा अधिकार: सुप्रीम कोर्ट

admin Thu, Jan 9, 2025

 'बेटी की पढ़ाई के लिए माता-पिता को अपने वित्तीय संसाधनों की सीमा के भीतर आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराने के लिए बाध्य किया जा सकता है. 26 साल से अलग रह रहे दंपति के मामले में जस्टिस सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की बेंच ने कहा कि, उसका मानना है कि पिछले 26 सालों से अलग रह रहे एक दंपत्ति की बेटी कानून के अनुसार 43 लाख रुपये की हकदार है.

26 साल से अलग रह रहे दंपती के मामले में सुनवाई बेंच ने 2 जनवरी को पारित आदेश में कहा कि, बेटी होने के नाते उसे अपने माता-पिता से शिक्षा का खर्च प्राप्त करने का अविभाज्य, कानूनी रूप से लागू करने योग्य, वैध और वैध अधिकार है. बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा, "हम केवल इतना ही मानते हैं कि बेटी को अपनी शिक्षा जारी रखने का मौलिक अधिकार है, जिसके लिए माता-पिता को अपने वित्तीय संसाधनों की सीमा के भीतर आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराने के लिए बाध्य किया जा सकता है."

बेटी आयरलैंड में पढ़ रही है बेंच ने कहा कि पक्षकारों की बेटी वर्तमान में आयरलैंड में पढ़ रही है और उसने अपनी गरिमा बनाए रखने के लिए अपने पिता द्वारा उसकी शिक्षा पर खर्च की गई 43 लाख रुपये की राशि को अपने पास रखने से इनकार कर दिया है. बेंच ने आगे कहा कि, ऐसा लगता है कि बेटी ने अपने पिता को वह राशि वापस करने पर जोर दिया, हालांकि पिता ने यह राशि लेने से इनकार कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, बेटी को इस राशि को अपने पास रखने का अधिकार है बेंच ने कहा कि, पिता ने बिना किसी ठोस कारण के पैसे दिए जिससे पता चलता है कि वह अपनी बेटी की पढ़ाई के लिए वित्तीय सहायता देने के लिए आर्थिक रूप से सक्षम है. कोर्ट ने यह भी कहा कि बेटी को इस राशि को अपने पास रखने का अधिकार है. इसलिए उसे अपनी मां या फिर पिता को रकम वापस करने की आवश्यकता नहीं है. वह इसे अपनी इच्छानुसार उचित रूप से खर्च कर सकती है.

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