8th November 2026

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बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सख्ती : सरकार के दबाव के बाद Meta ने उठाया बड़ा कदम

नई दिल्ली: भारत सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर अपना रुख और सख्त कर दिया है। इसी बीच टेक कंपनी Meta ने बाल यौन शोषण और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की जानकारी संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ साझा करने पर सहमति जताई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के संचालन के लिए बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा बेहद जरूरी है और इस मामले में किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, Meta का यह कदम बच्चों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखने की दिशा में शुरुआती पहल है। हालांकि, सरकार का मानना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए अभी कई और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।

बच्चों की सुरक्षा के लिए और कदम उठाने की जरूरत

समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, सरकारी सूत्रों ने बताया कि Meta ने बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों को संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों तक पहुंचाने पर सहमति दी है। सरकार ने इसे महत्वपूर्ण शुरुआत बताया है, लेकिन साथ ही कहा है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अभी काफी काम किया जाना बाकी है।

सरकार की ओर से सोशल मीडिया कंपनियों को साफ संदेश दिया गया है कि बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाली या उनके लिए खतरनाक सामग्री की पहचान कर उसे हटाने के लिए प्लेटफॉर्म को सक्रिय व्यवस्था विकसित करनी होगी। नियमों का पालन नहीं करने वाले प्लेटफॉर्म के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई भी की जा सकती है।

दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से भी बातचीत जारी

बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार सिर्फ Meta के साथ ही बातचीत नहीं कर रही है। सरकार अन्य सोशल मीडिया कंपनियों के साथ भी लगातार चर्चा कर रही है। उद्देश्य यह है कि बच्चों के लिए जोखिम पैदा करने वाली सामग्री की पहचान और उसे हटाने की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाया जाए।

सरकार चाहती है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ऐसी सामग्री के खिलाफ केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई न करें, बल्कि संभावित रूप से हानिकारक कंटेंट की सक्रिय रूप से पहचान कर उसे हटाने की व्यवस्था भी मजबूत करें।

NCPCR ने Meta के खिलाफ शुरू की थी कार्रवाई

यह मामला तब गंभीर हुआ जब राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने Meta के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। आयोग ने Meta के प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से संबंधित कथित विज्ञापनों को लेकर जांच शुरू की थी।

NCPCR ने BBC आई की एक रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लेते हुए 3 जुलाई 2026 को Meta को नोटिस जारी किया था। नोटिस में सामने आए आरोपों को लेकर कंपनी से जवाब मांगा गया था।

Meta ने करीब एक सप्ताह बाद आयोग को अपना जवाब सौंपा। इसके बाद NCPCR ने Meta India के मैनेजिंग डायरेक्टर और Meta India के प्रमुख को आयोग के समक्ष पेश होने के लिए बुलाया। Meta India के प्रतिनिधि 9 सितंबर को NCPCR के सामने पेश हुए।

NHRC ने भी मामले में जांच शुरू की

इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी जांच शुरू की है। आयोग ने दिल्ली पुलिस को Meta से जुड़े आरोपों की व्यापक जांच करने के निर्देश दिए हैं।

आरोप है कि Meta के स्वामित्व वाले Instagram पर पेड विज्ञापनों के माध्यम से भारत में बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को बढ़ावा दिया गया। NHRC ने दिल्ली पुलिस से यह भी जांच करने को कहा है कि Meta और मामले से जुड़े अन्य पक्षों ने पॉक्सो एक्ट के तहत निर्धारित रिपोर्टिंग नियमों का पालन किया था या नहीं।

जांच में रिपोर्टिंग व्यवस्था भी अहम

पूरे मामले की जांच केवल ऑनलाइन मौजूद आपत्तिजनक सामग्री तक सीमित नहीं है। जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि ऐसी सामग्री सामने आने के बाद उसे रोकने, हटाने और संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना देने के लिए क्या कदम उठाए गए।

यानी एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि सोशल मीडिया कंपनियों ने बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में अपनी कानूनी जिम्मेदारियों और अनिवार्य रिपोर्टिंग नियमों का पालन किया या नहीं।

सरकार की बढ़ती सख्ती के बीच Meta का बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की जानकारी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देने पर सहमत होना इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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