नई दिल्ली : NSA बोर्ड का पुनर्गठन: रॉ के पूर्व प्रमुख आलोक जोशी बने अध्यक्ष, सरकार ने दी सेना को खुली छूट
केंद्र सरकार ने बुधवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (NSAB) का बड़ा पुनर्गठन करते हुए इसके अध्यक्ष पद पर पूर्व रॉ चीफ आलोक जोशी की नियुक्ति की है। यह कदम हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले के बाद लिया गया है, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी। अब सरकार ने आतंक के खिलाफ अपनी रणनीति को और मजबूत करने का इरादा जता दिया है।
✅ बोर्ड में इन पूर्व अधिकारियों को मिली जगह:
एयर मार्शल पीएम सिन्हा (पूर्व पश्चिमी वायु सेना कमांडर)
लेफ्टिनेंट जनरल एके सिंह (पूर्व दक्षिणी सेना कमांडर)
रियर एडमिरल मोंटी खन्ना (रिटायर्ड नौसेना अधिकारी)
राजीव रंजन वर्मा (पूर्व IPS अधिकारी)
मनमोहन सिंह (रिटायर्ड पुलिस अधिकारी)
वेंकटेश वर्मा (पूर्व राजनयिक, IFS अधिकारी)
बोर्ड में अब कुल 7 सदस्य होंगे, जिनमें देश की सैन्य, खुफिया और राजनयिक सेवाओं के दिग्गज शामिल हैं।
🔥 पहलगाम हमले के बाद एक्शन मोड में केंद्र सरकार
हमला होते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आवास पर सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की अहम बैठक बुलाई।
CCS के साथ-साथ राजनीतिक मामलों और आर्थिक मामलों की कैबिनेट समितियों की भी बैठकें हुईं।
भारत ने सीमा पार आतंकवाद पर पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया और सिंधु जल संधि को स्थगित करने जैसे बड़े फैसलों की घोषणा की।
🚩 पीएम मोदी ने सेना को दी "खुली छूट"
प्रधानमंत्री ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, CDS जनरल अनिल चौहान और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ सुरक्षा बैठक की।
बैठक में पीएम मोदी ने सेना की पेशेवर क्षमताओं पर भरोसा जताते हुए कहा कि सेना को कार्रवाई के तरीकों, समय और लक्ष्य तय करने की पूरी छूट है।
सेना अब अपने हिसाब से आतंक के खिलाफ जवाबी कदम उठा सकती है।
🇮🇳 बोर्ड पुनर्गठन से क्या बदलेगा?
NSAB का पुनर्गठन भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को और धारदार बनाने का संकेत है।
यह बोर्ड अब आतंकवाद, साइबर हमले और सीमा पार खतरों से निपटने के लिए सरकार को सलाह देगा।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इसमें रिटायर्ड सैन्य और खुफिया अफसरों की नियुक्ति से नीति निर्माण में ग्राउंड रियलिटी का बेहतर समावेश होगा।
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