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QR Code on Medicine : अब नहीं चलेगी नकली दवाओं की चाल! QR कोड स्कैन करते ही सामने आएगी पूरी जानकारी

Media Yodha Desk Sun, Jun 28, 2026

QR Code on Medicine: नकली दवाओं के संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है.स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने वैक्सीन, एंटीबायोटिक दवा और कैंसर की दवाओं पर QR कोड अनिवार्य कर दिया है. बदले हुए नियमों के तहत आवश्यक दवाओं पर QR कोड लगाना अनिवार्य किया गया है, ताकि दवा कहां बनी, कैसे बनी सब कुछ एक क्लिक में पता चल सकेगा. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसके लिए औषधि नियम 1945 में संशोधन को अधिसूचित कर दिया है.इससे क्यूआर कोड स्कैन करते ही देश में बनीं दवाइयों की पूरी जन्म कुंडली सामने आ जाएगी. सभी तरह के टीके, एंटीबायोटिक दवाएं, कैंसर रोधी दवाएं और नशा उन्मूलन से जुड़ी शेड्यूल H2 की दवाएं शामिल हैं.

दवा पैकेजिंग पर क्यूआर कोड अनिवार्य

निर्माता कंपनियों को इन दवाओं की प्राइमरी पैकेजिंग पर कोड मुद्रित या चिपकाना अनिवार्य होगा. अगर दवा की पैकेजिंग पर जगह पर्याप्त नहीं है तो क्यूआर कोड को सेकेंडरी पैकेजिंग पर लगाया जा सकता है. इस डिजिटल कोड से ग्राहक, फार्मासिस्ट, वितरक समेत कोई भी दवाओं की प्रामाणिकता, पहचान सत्यापित करने में सक्षम बनाएगा.

घटिया क्वालिटी की दवाओं पर लगाम

निर्माता कंपनियों को इन दवाओं की प्राइमरी पैकेजिंग पर कोड मुद्रित या चिपकाना अनिवार्य होगा. अगर दवा की पैकेजिंग पर जगह पर्याप्त नहीं है तो क्यूआर कोड को सेकेंडरी पैकेजिंग पर लगाया जा सकता है. इस डिजिटल कोड से ग्राहक, फार्मासिस्ट, वितरक समेत कोई भी दवाओं की प्रामाणिकता, पहचान सत्यापित करने में सक्षम बनाएगा.

दवा कहां बनी, कैसे बनी और एक्सपायरी डेट भी 

दवाओं पर मैन्युफैक्चरिंग डेट से लेकर पूरी जानकारी होगी. इसमें एक खास पहचान कोड, जेनेरिक और ब्रांड नाम, निर्माता कंपनी का विवरण, बैच संख्या, निर्माण और एक्सपायरी डे, निर्माण लाइसेंस संख्या और जहां लागू हो वहां केमिकल फार्मूले का विवरण शामिल होगा. सरकार अगले साल जुलाई से नकली दवाओं प लगाम लगाने के लिए चरणबद्ध तरीके से ये काम कर रही है. ताकि मरीजों, तीमारदारों या कोई भी पता लगा पाए कि दवा कैसी है.

नकली दवाओं पर अंकुश

सरकार ने कहा है कि इस कदम का मकसद पारदर्शिता बढ़ाना और दवाओं की आसानी से जांच करना है, ताकि ग्राहक यह पक्का कर सकें कि प्रोडक्ट असली है, न कि नकली या खराब क्वालिटी की. दवा इंडस्ट्री में इसे बड़े पैमाने पर लागू किया जाना है. सरकार ने नियमों का पालन करने के लिए समयसीमा तय की है.

1 जुलाई 2027 से नए नियम लागू

वैक्सीन, कैंसर की दवाओं और नशीली, साइकोट्रोपिक दवाओं के निर्माताओं को 1 जुलाई 2027 से लेबलिंग के नए नियमों का पालन करना होगा. एंटीबायोटिक्स समेत जीवाणु रोधी दवाओं के लिए QR कोड का नियम उसके एक साल बाद यानी 1 जुलाई, 2028 से लागू होगा. यह कदम ऐसे वक्त लिया गया है, जब बाजार में नकली दवाओं के आने को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं,जिससे मरीजो की सुरक्षा और पब्लिक हेल्थ के लिए गंभीर खतरा पैदा हो रहा है.

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