पहलगाम हमले की कीमत चुका रहा पाकिस्तान : एक साल बाद भी बंद हैं बगलीहार डैम के सभी गेट... VIDEO
नई दिल्ली : जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में चिनाब नदी पर स्थित बगलीहार बांध के सभी गेट अभी भी पूरी तरह से बंद हैं। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 'सिंधु जल संधि' को निलंबित कर दिया था। इस निलंबन को लागू हुए अब एक साल बीत चुका है। सिंधु जल संधि को लेकर भारत सरकार के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद स्थगित की गई यह अहम जल-बंटवारा संधि अभी भी ठंडे बस्ते में है। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत ही दोनों देशों के बीच सिंधु, चिनाब, झेलम आदि नदियों के पानी का बंटवारा होता है। बांध के गेटों का लगातार बंद रहना इस बात को साफ तौर पर दर्शाता है कि संधि के निलंबन का इस क्षेत्र के जल प्रबंधन और पनबिजली संचालन पर कितना गहरा और निरंतर प्रभाव पड़ा है। चिनाब नदी पर बनी यह महत्वपूर्ण 'बगलीहार पनबिजली परियोजना' आतंकी हमले के बाद लिए गए इस कड़े फैसले के बाद से ही लगातार कड़ी निगरानी में रखी गई है।
बगलिहार डैम के गेट क्यों बंद रखे गए हैं?
समझौता निलंबित करने के बाद, भारत ने पाकिस्तान की तरफ जाने वाले पानी के बहाव को रोकने और कूटनीतिक दबाव बनाने के लिए चिनाब नदी पर बने बगलिहार डैम के सभी मुख्य गेट बंद कर दिए थे। खबर के मुताबिक, इस बात को एक साल बीत चुका है, लेकिन भारत का रुख अब भी सख्त है। सिंधु जल समझौता अभी भी निलंबित है और बगलिहार डैम के गेट आधिकारिक तौर पर बंद ही रखे गए हैं।
बारिश के कारण गेट खोले थे
भले ही डैम के गेट पिछले एक साल से बंद हैं, लेकिन हाल ही में रामबन और आसपास के इलाकों में बहुत भारी बारिश हुई है। इस मूसलाधार बारिश के कारण चिनाब नदी का जलस्तर अचानक खतरे के निशान की तरफ बढ़ने लगा। डैम की सुरक्षा को बनाए रखने और अतिरिक्त पानी के दबाव को कम करने के लिए, प्रबंधन को डैम के गेट कुछ समय के लिए खोले थे। फिर बंद कर दिए गए।
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