मोबाइल रिचार्ज की जरूरत नहीं : बिना इंटरनेट फोन पर फ्री में देखें Live TV, जानिए D2M कैसे करेगा काम
Media Yodha Desk Fri, Oct 2, 2026
नई दिल्ली: टेलीकम्युनिकेशन और ब्रॉडकास्टिंग की दुनिया में आने वाले समय में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। जल्द ही मोबाइल फोन पर Live TV, News और Sports देखने के लिए मोबाइल डेटा या Wi-Fi की जरूरत नहीं पड़ेगी। देश का सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती Direct-to-Mobile यानी D2M ब्रॉडकास्टिंग सर्विस को कमर्शियल स्तर पर शुरू करने की तैयारी कर रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रसार भारती अगले महीने D2M सर्विस के लिए Request for Proposal (RFP) जारी कर सकता है। तकनीक के परीक्षण और तकनीकी मूल्यांकन के बाद अब इसे बड़े स्तर पर लागू करने की दिशा में काम आगे बढ़ रहा है। सरकारी समीक्षा के दौरान तेजस नेटवर्क्स द्वारा विकसित डिवाइस के तकनीकी वैलिडेशन टेस्ट के सफल रहने के बाद इस योजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तेज हुई है।
क्या है Direct-to-Mobile (D2M) तकनीक?
D2M ऐसी ब्रॉडकास्टिंग तकनीक है, जिसमें मोबाइल फोन तक वीडियो और अन्य मल्टीमीडिया कंटेंट पहुंचाने के लिए पारंपरिक 4G या 5G मोबाइल नेटवर्क की जरूरत नहीं होती। इसे आसान भाषा में FM रेडियो की तरह समझा जा सकता है। जैसे FM रेडियो बिना इंटरनेट के रेडियो सिग्नल प्राप्त करता है, उसी तरह D2M तकनीक रेडियो फ्रीक्वेंसी के जरिए मोबाइल तक कंटेंट पहुंचा सकती है।
इस तकनीक के जरिए यूजर्स अपने फोन पर Live News, Sports, Entertainment और दूसरे मल्टीमीडिया कंटेंट देख सकेंगे, बिना मोबाइल डेटा खर्च किए। खास तौर पर ऐसे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल उपयोगी हो सकता है, जहां मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट कनेक्टिविटी सीमित है।
D2M से वीडियो स्ट्रीमिंग का ट्रैफिक सीधे मोबाइल डेटा नेटवर्क पर नहीं जाएगा। इससे मोबाइल नेटवर्क पर बढ़ने वाले डेटा ट्रैफिक को कम करने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि, निजी टेलीकॉम कंपनियों ने इस तकनीक को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं, क्योंकि इसके बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से मोबाइल डेटा की खपत प्रभावित हो सकती है।
IIT कानपुर के साथ हो चुकी है टेस्टिंग
D2M तकनीक को लेकर प्रसार भारती और IIT कानपुर की ओर से भी अध्ययन किया गया है। स्टडी में 470-582 MHz बैंड में D2M ब्रॉडकास्टिंग के प्रभाव का परीक्षण किया गया। इसके अलावा प्रसार भारती ने IIT कानपुर और Saankhya Labs, जिसे अब तेजस नेटवर्क्स ने अधिग्रहित किया है, के साथ मिलकर दिल्ली, बेंगलुरु समेत 19 से ज्यादा शहरों में D2M के ट्रायल किए हैं।
इन परीक्षणों के दौरान बिना SIM कार्ड और इंटरनेट कनेक्शन के मोबाइल फोन पर मल्टीमीडिया कंटेंट प्रसारित करके तकनीक की क्षमता का परीक्षण किया गया।
D2M के लिए स्मार्टफोन में खास हार्डवेयर जरूरी
D2M को बड़े स्तर पर लागू करने में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक मौजूदा स्मार्टफोन का हार्डवेयर है। बाजार में मौजूद अधिकांश मोबाइल फोन इस तकनीक को सीधे सपोर्ट नहीं करते हैं।
D2M के लिए फोन में विशेष रिसीविंग हार्डवेयर की जरूरत पड़ सकती है, जिसमें बेसबैंड प्रोसेसिंग यूनिट, एंटीना, लो-नॉइज एम्पलीफायर और बेसबैंड फिल्टर जैसे घटक शामिल हैं। इसके साथ ही बड़े पैमाने पर ब्रॉडकास्टिंग के लिए देश के मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत करने की जरूरत होगी।
टीवी की पहुंच बढ़ाने में मददगार हो सकती है तकनीक
सरकार D2M को उन लोगों तक टीवी और वीडियो कंटेंट पहुंचाने के संभावित माध्यम के तौर पर देख रही है, जिनके पास पारंपरिक टीवी सर्विस उपलब्ध नहीं है। सरकारी अनुमानों के अनुसार, भारत में करीब 280 मिलियन परिवारों में से लगभग 190 मिलियन परिवारों तक टीवी सर्विस पहुंची है। ऐसे में बड़ी संख्या में परिवार अभी भी टीवी सेवा से दूर हैं।
भारत में मोबाइल फोन की व्यापक पहुंच को देखते हुए D2M तकनीक भविष्य में इस अंतर को कम करने का एक माध्यम बन सकती है। हालांकि, इसके लिए बड़े स्तर पर तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर और D2M-सपोर्टेड डिवाइस की उपलब्धता जरूरी होगी।
विज्ञापन
जरूरी खबरें
विज्ञापन