CBSE विवाद में बड़ा अपडेट : ठेका देने पर सवाल, COEMPT पर गिरी जांच की तलवार; जानें पूरी डिटेल्स
नई दिल्ली : सीबीएसई विवाद को लेकर शिक्षा मंत्रालय ने आखिरकार उस कंपनी के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी, जिसे टेंडर आवंटित किया गया था। COEMPT को ठेका देने पर CBSE से रिपोर्ट मांगी गई है। टेंडर प्रक्रिया का विवरण एकत्रित किया गया है, जिम्मेदार पाए गए अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी। बता दें कि शिक्षा मंत्रालय ने COEMPT को ठेका देने की रिपोर्ट निःशुल्क दी है। मंत्रालय ने कहा है कि अंतिम चरण में जाने वाले अधिकारी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अंतिम अनुबंध के तहत, विक्रेता को भारी वित्तीय दंड और अनुबंध समाप्ति का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन उसे ब्लैकलिस्ट नहीं किया जा सकता।
जानें अब आगे क्या क्या होगा
अनुबंध में सीबीएसई द्वारा चिह्नित गंभीर मुद्दों के समाधान में प्रत्येक 15 मिनट की देरी के लिए 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
मूल कारण विश्लेषण और सुधारात्मक कार्य योजना प्रस्तुत करने में विफलता के लिए प्रत्येक 60 मिनट की देरी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लागू होता है।
समझौते में सीबीएसई को गंभीर मामलों में सुरक्षा जमा राशि जब्त करने और अनुबंध समाप्त करने का अधिकार भी दिया गया है।
सीबीएसई ने अपनी डिजिटल स्कैनिंग और ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन (OSM) प्रणाली का ठेका हैदराबाद की कंपनी Coempt Edu Teck को दिया था। यह कंपनी लाखों उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग और डिजिटल जांच का काम संभाल रही है।
OSM प्रणाली को लेकर सवाल उठने के बाद यह मामला चर्चा में आया। आरोप हैं कि सिस्टम में जानकारी उजागर होने का खतरा, सुरक्षा संबंधी कमियां और कामकाज में लापरवाही जैसी समस्याएं थीं।
टेंडर से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, 28 अगस्त 2025 को जारी शुरुआती टेंडर में सख्त कार्रवाई का प्रावधान था।
गंभीर नियम उल्लंघन होने पर सीबीएसई की समिति कंपनी की बैंक गारंटी जब्त करने, अनुबंध खत्म करने और कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश कर सकती थी। लेकिन 20 सितंबर 2025 को सीबीएसई ने एक संशोधन (कोरिजेंडम) जारी कर टेंडर से ब्लैकलिस्ट करने का प्रावधान हटा दिया।
हालांकि आर्थिक जुर्माना, जमा राशि जब्त करने और अनुबंध समाप्त करने जैसे प्रावधान पहले की तरह बने रहे, लेकिन ब्लैकलिस्ट करना अब विकल्प नहीं रहा।
इसके बाद 5 दिसंबर 2025 को Coempt Edu Teck को यह ठेका आधिकारिक तौर पर दे दिया गया था।
Recent Contract के अनुसार CEOMPT को ब्लैकलिस्ट नहीं कर सकता CBSE... ज्यादा से ज्यादा 1 लाख रूपये का अलग अलग गलतियों पर फाइन लगाया जा सकता है..
CBSE के अगस्त 2025 के टेंडर में ब्लैकलिस्ट करने का प्रावधान शामिल था
* टेंडर के अनुसार, गंभीर लापरवाही होने पर CBSE की समिति कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी कर सकती थी
* ऐसे मामलों में परफॉर्मेंस बैंक गारंटी (PBG) जब्त करने, कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने और कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने का अधिकार था
* बार-बार नियमों का उल्लंघन होने पर सिक्योरिटी डिपॉजिट जब्त करने, ब्लैकलिस्ट करने और अनुबंध समाप्त करने की व्यवस्था भी थी
* लेकिन सितंबर 2025 में जारी एक संशोधन (Corrigendum) के जरिए ब्लैकलिस्टिंग का प्रावधान हटा दिया गया।
* इसके बाद CBSE ने आर्थिक जुर्माना, सिक्योरिटी डिपॉजिट जब्त करने और कॉन्ट्रैक्ट समाप्त करने के अधिकार तो रखे, लेकिन ब्लैकलिस्ट करने का अधिकार हटा दिया
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