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Ebola Virus : कितना खतरनाक है इबोला का बुंडीबुग्यो स्ट्रेन, भारत को इससे कितना खतरा?

Media Yodha Desk Tue, May 19, 2026

Ebola Virus: अफ्रीका के कांगो और युगांडा में फैले इबोला वायरस के नए प्रकोप ने दुनियाभर में चिंता बढ़ा दी है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन  ने इसे पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न घोषित किया है.  इस बार इंफेक्शन के पीछे इबोला का बुंडीबुग्यो स्ट्रेन बताया जा रहा है, जिसने कई लोगों की जान ले ली है. ऐसे में भारत समेत कई देशों में डर बढ़ गया है कि क्या यह वायरस यहां भी खतरा बन सकता है.

कैसे फैलती है यह बीमारी?

अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक, इबोला एक बेहद गंभीर और कई मामलों में जानलेवा बीमारी है, जो इंफेक्टेड व्यक्ति के बॉडी फ्लूइड्स के सीधे संपर्क से फैलती है. इसमें खून, उल्टी, पसीना, लार, यूरिन और शरीर से निकलने वाले दूसरे फ्लूइड शामिल हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह वायरस कोविड-19 की तरह हवा में तेजी से नहीं फैलता, लेकिन इंफेक्टेड व्यक्ति के संपर्क में आने पर संक्रमण का खतरा काफी ज्यादा होता है.

क्या इससे जा सकती है जान? 

WHO के अनुसार, बुंडीबुग्यो वायरस ऑर्थोइबोलावायरस फैमिली का हिस्सा है और यह इबोला बीमारी का कारण बनता है. इस वायरस की मृत्यु दर 80 से 90 प्रतिशत तक हो सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक इस प्रकोप में 80 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि संदिग्ध मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।.

क्या हैं इसके शुरुआती लक्षण?

डॉक्टरों के मुताबिक, इबोला के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे लग सकते हैं. इसमें तेज बुखार, शरीर दर्द, कमजोरी, सिर दर्द और गले में खराश शामिल है. लेकिन जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, मरीज में उल्टी, दस्त, पेट दर्द और शरीर के अंदर व बाहर ब्लीडिंग जैसे गंभीर लक्षण दिखने लगते हैं. कई मामलों में उल्टी और मल में खून, नाक और मसूड़ों से ब्लीडिंग तक हो सकती है. वायरस दिमाग पर भी असर डाल सकता है, जिससे मरीज में कन्फ्यूजन, चिड़चिड़ापन और आक्रामक व्यवहार देखने को मिल सकता है.

भारत में क्या है स्थिति?

भारत में फिलहाल इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है. हेल्थ मिनिस्ट्री और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना बेहद जरूरी है.  डॉक्टर ने बताया कि इबोला कोविड-19 से अलग है, क्योंकि यह मुख्य रूप से इंफेक्टेड बॉडी फ्लूइड्स के सीधे संपर्क से फैलता है, जबकि कोविड हवा और रेस्पिरेटरी ड्रॉपलेट्स के जरिए तेजी से फैलता था. यही वजह है कि इबोला का इंफेक्शन सीमित संपर्क में ज्यादा फैलता है, लेकिन इसकी गंभीरता कहीं ज्यादा मानी जाती है.

कैसे कर सकते हैं इससे बचाव?

एक्सपर्ट्स लोगों को सलाह दे रहे हैं कि संक्रमित व्यक्ति के खून, कपड़ों, बिस्तर या मेडिकल उपकरणों के संपर्क से बचें. इसके साथ ही प्रभावित देशों से लौटने वाले लोगों को 21 दिनों तक अपनी हेल्थ मॉनिटर करनी चाहिए. डॉक्टरों का कहना है कि समय रहते पहचान और सख्त निगरानी ही इस वायरस को फैलने से रोकने का सबसे बड़ा तरीका है..

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