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आयातित दवाओं पर सरकार सख्त : अब 12 महीने की वैधता के बिना नहीं मिलेगी एंट्री

Media Yodha Desk Mon, Jun 29, 2026

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय आयातित दवाओं से जुड़े नियमों में अहम बदलाव की तैयारी कर रहा है। मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम 31 में संशोधन का मसौदा जारी कर आम जनता और संबंधित पक्षों से सुझाव एवं आपत्तियां मांगी हैं। इस प्रस्ताव का उद्देश्य दवा क्षेत्र में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देना और मरीजों के लिए गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

12 महीने की शेष शेल्फ लाइफ होना पर्याप्त होगा

22 जून को गजट अधिसूचना के जरिए जारी किए गए इस मसौदे में आयातित दवाओं के लिए मौजूदा 60 प्रतिशत से अधिक शेष शेल्फ लाइफ की अनिवार्यता में बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है। नए प्रस्ताव के अनुसार, अब आयात के समय दवा की कम से कम 12 महीने की शेष शेल्फ लाइफ होना पर्याप्त होगा। बता दें कि दवाओं की शेल्फ लाइफ वह समयावधि है, जिसके दौरान कोई दवा सुरक्षित और पूरी तरह से असरदार रहती है। यह अवधि दवा के निर्माण की तारीख से शुरू होकर उस पर छपी एक्सपायरी डेट तक होती है।

हालांकि, मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि बायोलॉजिकल उत्पादों और रेडियोफार्मास्यूटिकल्स के मामले में मौजूदा नियम ही लागू रहेंगे। यानी इन विशेष श्रेणी की दवाओं के लिए आयात के समय 60 प्रतिशत से अधिक शेष शेल्फ लाइफ की अनिवार्यता में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इसका कारण इन दवाओं की विशेष प्रकृति और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी आवश्यकताएं हैं।

इससे क्या फायदा होगा?
मंत्रालय का कहना है कि इस संशोधन से दवा आपूर्ति श्रृंखला (फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन) अधिक प्रभावी बनेगी। आयातित दवाओं के पास देश में आने के समय कम से कम 12 महीने की शेष वैधता होने से उन्हें बाजार तक पहुंचाने और मरीजों तक उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। इससे मरीजों को उपयोग योग्य शेल्फ लाइफ वाली गुणवत्तापूर्ण दवाएं मिलती रहेंगी। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से दवाओं की अनावश्यक बर्बादी भी कम होगी, क्योंकि मौजूदा सख्त शेल्फ लाइफ नियमों के कारण कई बार दवा भंडारण और वितरण में नुकसान होता है। इससे सप्लाई मैनेजमेंट बेहतर होगा, लागत घटेगी और देश में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता भी मजबूत होगी।

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