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भारत को मिलेगा हाईटेक सुरक्षा कवच : दिल्ली में तैयार होगा पहला रेडिएशन-प्रूफ CBRN कमांड सेंटर

Media Yodha Desk Fri, Jul 3, 2026

नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली को परमाणु हमलों, जैविक हथियारों, रासायनिक रिसाव और अन्य महाविनाशकारी आपदाओं से सुरक्षित रखने के लिए दिल्ली फायर सर्विसेज ने एक महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की है। इसके तहत कनॉट प्लेस स्थित मौजूदा फायर सर्विसेज मुख्यालय की जगह एक नया अत्याधुनिक मुख्यालय बनाया जाएगा, जिसमें देश का पहला रेडिएशन-शील्डेड रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु (CBRN) कमांड सेंटर स्थापित किया जाएगा। परियोजना के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है और इसे अगले 5 वर्षों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। नए मुख्यालय का भूमिगत हिस्सा विशेष रूप से इस कमांड सेंटर के लिए विकसित किया जाएगा, ताकि किसी भी परमाणु, रासायनिक, जैविक या रेडियोलॉजिकल आपदा की स्थिति में सुरक्षित वातावरण से आपातकालीन संचालन और राहत कार्यों का प्रभावी ढंग से संचालन किया जा सके।

दिल्ली फायर सर्विसेज का यह आधुनिक कमांड सेंटर अत्याधुनिक तकनीकों और सुरक्षा मानकों से लैस होगा। इसके माध्यम से आपदा प्रबंधन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, त्वरित निर्णय लेने और राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

AI और हाई-टेक तकनीक से होगा फायर सिस्टम मजबूत

अगले एक वर्ष के भीतर विभाग एक अत्याधुनिक केंद्रीकृत कमांड रूम स्थापित करेगा, जिसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक से लैस किया जाएगा। यह AI आधारित सिस्टम दिल्ली के ट्रैफिक, आपातकालीन कॉल्स के पैटर्न और मौसम संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण कर आग लगने की संभावित घटनाओं का पूर्वानुमान लगाने और आपातकालीन प्रतिक्रिया समय को कम करने में सहायता करेगा। इसके साथ ही दिल्ली के सभी 5 परिचालन जोन उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और मध्य में भी अलग-अलग कमांड सेंटर विकसित किए जाएंगे। इन केंद्रों के माध्यम से फायर एवं इमरजेंसी सेवाओं की निगरानी, समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

विशेष सुरक्षा मानकों के साथ तैयार होगा कमांड सेंटर

प्रस्तावित कमांड सेंटर को विशेष इंजीनियरिंग तकनीक के साथ भूमिगत बनाया जाएगा। इसकी डिजाइन ऐसी होगी कि बाहरी परमाणु विकिरण या जहरीली गैसों के प्रभाव को भीतर तक पहुंचने से रोका जा सके। इसका उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में कमांड एवं कंट्रोल संचालन को सुरक्षित और निर्बाध बनाए रखना है। अधिकारियों के अनुसार, यदि भविष्य में किसी परमाणु, रासायनिक या जैविक (एनबीसी) आपदा जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न होती है, तो इस सुरक्षित कमांड सेंटर के भीतर मौजूद कर्मी आवश्यक आपातकालीन सेवाओं का संचालन जारी रख सकेंगे।

3 चरणों में लागू होगी आधुनिकीकरण योजना

चीफ फायर ऑफिसर अभिलाष मलिक के अनुसार, फायर सर्विस के आधुनिकीकरण की इस योजना को आपदा प्रबंधन की भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए 3 चरणों तत्काल, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक में विभाजित किया गया है। इसका उद्देश्य बुनियादी ढांचे, जनशक्ति, उपकरणों और तकनीकी क्षमताओं को चरणबद्ध तरीके से मजबूत बनाना है, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में विभाग की प्रतिक्रिया क्षमता और प्रभावशीलता बढ़ाई जा सके।

6 महीने में खुलेंगे 8 नए दमकल केंद्र

दिल्ली फायर सर्विस अगले छह महीनों में राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में आठ नए दमकल केंद्र स्थापित करेगी। इसके अलावा विभाग ने ड्रोन आधारित निगरानी, आधुनिक अग्निशमन तकनीकों और उन्नत आपदा प्रबंधन प्रणालियों को शामिल करते हुए अगले 25 वर्षों के लिए व्यापक आधुनिकीकरण का खाका तैयार किया है। इस योजना का लक्ष्य बदलती शहरी चुनौतियों और आपदाओं से निपटने के लिए फायर सर्विस को अधिक सक्षम, आधुनिक और तकनीक-संचालित बनाना है। ये केंद्र रोहिणी सेक्टर-41, गीता कॉलोनी, आनंद पर्वत, यमुना विहार, द्वारका सेक्टर-3, द्वारका सेक्टर-20, आईएफसी नरेला और बुधपुर माजरा में बनाए जा रहे हैं।

दिल्ली को चाहिए 120 दमकल केंद्र

अभिलाष मलिक के मुताबिक, वर्तमान में दिल्ली फायर सर्विस के पास 71 दमकल केंद्र हैं, जहां कुल 2,459 कर्मी कार्यरत हैं। हालांकि, गृह मंत्रालय के निर्धारित मानकों के अनुसार दिल्ली जैसे महानगर के लिए लगभग 120 दमकल केंद्र और करीब 24,000 कर्मियों की आवश्यकता है। मंत्रालय ने प्रत्येक दमकल केंद्र के लिए 131 कर्मियों का मानक तय किया है। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए दिल्ली फायर सर्विस ने अगले 25 वर्षों में अपने कार्यबल को बढ़ाकर 48,000 कर्मियों तक पहुंचाने की योजना बनाई है। इसी दिशा में विभाग 12,174 अतिरिक्त कर्मियों की भर्ती के प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है। इस भर्ती का उद्देश्य मौजूदा दमकल केंद्रों में कर्मचारियों की कमी को दूर करना और नए स्थापित होने वाले केंद्रों के लिए पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराना है।

हर वर्ष 8 नए दमकल केंद्र खोलने की तैयारी

दिल्ली फायर सर्विस (DFS) के अधिकारियों के अनुसार, विभाग हर साल आठ नए दमकल केंद्र स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है। पहले चरण में आठ नए केंद्रों का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। इसका उद्देश्य राजधानी में अग्निशमन बुनियादी ढांचे की कमी को दूर करते हुए गृह मंत्रालय द्वारा निर्धारित 120 दमकल केंद्रों के लक्ष्य को चरणबद्ध तरीके से हासिल करना है।

नए केंद्रों के लिए कई स्थानों की पहचान

डीएफएस ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के साथ मिलकर नौ और संभावित स्थलों की पहचान की है। इनमें रोहिणी, सुल्तानपुरी, महिपालपुर, पीतमपुरा, सराय रोहिल्ला और रोहतक रोड स्थित गोल्डन पार्क सहित अन्य स्थान शामिल हैं। विभाग ने इन स्थलों को फायर स्टेशन निर्माण के लिए उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। इसके अलावा, डीडीए की क्षेत्रीय योजनाओं के तहत बुराड़ी, कराला, मुंडका औद्योगिक क्षेत्र, सोनिया विहार, करावल नगर औद्योगिक क्षेत्र, मंडोली औद्योगिक क्षेत्र, कापसहेड़ा और आया नगर समेत 14 अन्य स्थानों पर भी भूमि आवंटन का अनुरोध किया गया है। वहीं, डीडीए की 48 गांवों के शहरीकरण योजना के अंतर्गत 28 अतिरिक्त दमकल केंद्रों के लिए भी भूमि मांगी गई है, जिनमें निजामपुर और मुंधेला कलां के लिए भूमि की पुष्टि हो चुकी है। इन प्रस्तावों का उद्देश्य राजधानी के सभी क्षेत्रों में आपातकालीन अग्निशमन सेवाओं की पहुंच और प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत बनाना है।

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