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: "अधूरा पुल निर्माण बना ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब, मजदूरों को नहीं मिला भुगतान"

admin Mon, Oct 21, 2024

ग्रामीण क्षेत्रों को शहरी क्षेत्रों से जोड़ने के उद्देश्य से पुल, पुलिया और सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। लेकिन कई स्थानों पर इनका निर्माण अधूरा रह गया है, जिसके चलते ग्रामीणों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसी प्रकार का अधूरा निर्माण एमसीबी जिले के दूरस्थ वन क्षेत्र, भरतपुर विकासखंड में देखा गया है। बरवाही के घुघरी पारा में झिरिया नाले पर 18 लाख रुपये की लागत से पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ था, लेकिन जून महीने से यह काम अधूरा पड़ा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, मजदूरों को उनकी मजदूरी भी अब तक नहीं मिली है। ग्रामीण महिला रानी तिवारी ने बताया कि पुल में न तो लोहे का सही उपयोग किया गया है और न ही पर्याप्त सीमेंट का। इसके कारण कई दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। कई बच्चे बारिश के दौरान बह गए, लेकिन आज तक कोई अधिकारी मौके पर निरीक्षण के लिए नहीं आया। मजदूरों को अब तक उनकी मजदूरी का भुगतान भी नहीं किया गया है। गांव में अगर कोई बीमार हो जाए, तो उसे अस्पताल ले जाना भी संभव नहीं हो पाता। गांव के निवासी महेश प्रसाद मिश्रा ने कहा कि यह पुल पहले टूट गया था, जिसके बाद इसे बनाया जा रहा था, लेकिन अब यह अधूरा पड़ा है। बरसात के मौसम में पानी पुल के ऊपर से बहने लगता है , जिससे स्कूल जाने वाले बच्चों को कई घंटों तक इंतजार करना पड़ता है ताकि वे सुरक्षित अपने गांव लौट सकें। बच्चों और ग्रामीणों को आने-जाने में बहुत कठिनाई होती है।

ग्रामीण कमलेश कुमार उपाध्याय ने बताया कि पुल के निर्माण में लगे मजदूरों को अब तक उनकी मजदूरी नहीं मिली है। खराब निर्माण सामग्री के कारण पुल के चारों ओर दरारें भी पड़ गई हैं। ग्रामीण मुन्‍ना का कहना है कि बारिश के मौसम में उन्हें बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा। यह पुल जितना गांव वालों के लिए एक सपना था, उतना ही अब यह उनके लिए चिंता का विषय बन गया है। गांव के रामदास ने बताया कि पुल की खराब गुणवत्ता के चलते उनकी फसलें भी पानी में बह गईं।

वन क्षेत्र में ऐसे कई पुल और पुलियाएं हैं जो अधूरी पड़ी हैं। सरकार ने इनका निर्माण ग्रामीणों की सुविधा के लिए कराया था, लेकिन अब तक इनका उपयोग नहीं हो पाया है। लाखों रुपये निर्माण कार्य के नाम पर खर्च किए गए, लेकिन काम अधूरा छोड़ दिया गया। जब इस मुद्दे पर जिला पंचायत अधिकारी नितेश उपाध्याय से बात की गई, तो उन्होंने केवल यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि मामले की जांच की जाएगी और कार्रवाई की जाएगी।  

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