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RTE Admission : RTE पर सरकार का बड़ा एक्शन, बच्चों को प्रवेश न देने वाले निजी स्कूलों पर गिरेगी गाज, मान्यता रद्द करने की चेतावनी

Media Yodha Desk Tue, Apr 7, 2026

RTE Admission: छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि RTE के तहत बच्चों को प्रवेश नहीं देने वाले निजी स्कूलों की मान्यता रद्द कर दी जाएगी। बता दें कि प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने प्रतिपूर्ति राशि नहीं बढ़ाने पर RTE के तहत बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश नहीं देने का ऐलान किया था, जिसके बाद सरकार ने कड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के गैर-अनुदान प्राप्त निजी विद्यालयों में RTE के तहत प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं। इन सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), दुर्बल वर्ग और वंचित समूह के बच्चों को उनके निवास क्षेत्र के भीतर प्रवेश दिया जाता है।

सरकार ने यह भी साफ किया है कि छत्तीसगढ़ में दी जाने वाली शुल्क प्रतिपूर्ति राशि कई राज्यों के मुकाबले बेहतर या उनके बराबर है। कक्षा 1 से 5 तक: ₹7,000 प्रतिवर्ष, कक्षा 6 से 8 तक: ₹11,400 प्रतिवर्ष दिया जा रहा है। वहीं दूसरे राज्यों में मध्य प्रदेश में ₹4,419, बिहार में ₹6,569, झारखंड में ₹5,100, उत्तर प्रदेश में ₹5,400 दिया जा रहा है। हालांकि ओडिशा, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक में यह राशि अधिक बताई गई है, लेकिन समग्र रूप से छत्तीसगढ़ की प्रतिपूर्ति को संतुलित और उचित बताया गया है। वर्तमान में प्रदेश के 6,862 निजी स्कूलों में RTE के माध्यम से लगभग 3,63,515 बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। वहीं इस वर्ष कक्षा पहली में करीब 22,000 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है।

राज्य सरकार गरीब बच्चों की शिक्षा के प्रति संवेदनशील

छत्तीसगढ़ में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009, अप्रैल 2010 से प्रभावी है। इसके अंतर्गत प्रदेश के गैर-अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई हैं। इन सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर, दुर्बल वर्ग और वंचित समूह के बच्चों को उनके निवास क्षेत्र के भीतर प्रवेश दिलाया जाता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार गरीब बच्चों की शिक्षा के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और सभी के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

नियमों के उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई

यदि कोई निजी विद्यालय आरटीई के तहत प्रवेश देने से इंकार करता है या प्रक्रिया में व्यवधान डालता है तो राज्य शासन उनके विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा। इसमें विद्यालय की मान्यता समाप्त करने तक का प्रावधान शामिल है। शिक्षा विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस संबंध में फैलाई जा रही किसी भी भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक तथ्यों पर ही विश्वास करें।

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