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CG News : छत्तीसगढ़ में होनहार कलाकारों के लिए छात्रवृत्ति योजना, संस्कृति विभाग ने मांगे आवेदन

Media Yodha Desk Sun, Mar 1, 2026

रायपुर : छत्तीसगढ़ की लोक और जनजातीय सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने की दिशा में संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ ने वर्ष 2026-27 के लिए अर्थाभावग्रस्त होनहार युवा कलाकारों व विद्यार्थियों से छात्रवृत्ति योजना के तहत आवेदन आमंत्रित किए हैं। विभाग का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली युवाओं को कला के क्षेत्र में प्रशिक्षण और उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराना है, ताकि अभाव उनकी प्रगति में बाधा न बने।निर्धारित प्रारूप में पूर्ण दस्तावेजों सहित आवेदन 20 मार्च 2026 तक पंजीकृत डाक के माध्यम से भेजे जा सकेंगे। लिफाफे पर “अर्थाभावग्रस्त होनहार युवा कलाकारों/छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजना 2026-27” स्पष्ट रूप से अंकित करना अनिवार्य होगा। विलंबित या अपूर्ण आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

किन-किन विधाओं के लिए मिलेगा प्रोत्साहन

योजना में लोक एवं पारंपरिक जनजातीय कलाओं के अंतर्गत छत्तीसगढ़ की पारंपरिक नृत्य-गीत, लोकसंगीत, पंडवानी, ददरिया, करमा, सुवा, राउत नाचा, गोंडी गायन-वादन सहित अन्य लोक परंपराएं शामिल हैं। शास्त्रीय संगीत में हिंदुस्तानी और कर्नाटक गायन-वादन, शास्त्रीय नृत्य में भरतनाट्यम, कथक, कुचिपुड़ी, मोहिनीअट्टम, ओडिसी, मणिपुरी और कथकली जैसी विधाएं मान्य हैं। रंगमंच में हिंदी और छत्तीसगढ़ी नाटक सहित लोक-जनजातीय नाट्य रूपों को शामिल किया गया है। दृश्य कला के अंतर्गत ग्राफिक्स, मूर्तिकला, पेंटिंग, फोटोग्राफी, मृद्भांड (सेरामिक्स) और लोक-जनजातीय चित्रांकन को मान्यता दी गई है। सुगम शास्त्रीय संगीत की श्रेणी में ठुमरी, दादरा, टप्पा, भजन, गजल और कव्वाली को भी शामिल किया गया है।

पात्रता और आर्थिक सहायता

आवेदक का छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होना और चिन्हारी पोर्टल में पंजीयन अनिवार्य है। आयु 15 से 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आवेदक अथवा उसके अभिभावक की वार्षिक आय 72 हजार रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। चयनित विद्यार्थियों को प्रतिमाह 5,000 से 10,000 रुपये तक की छात्रवृत्ति डीबीटी/ई-पेमेंट के माध्यम से सीधे बैंक खाते में दी जाएगी।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह योजना प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर सशक्त बनाने में सहायक होगी। लोकनृत्य, पंथी, राउत नाचा, भरथरी और करमा जैसे पारंपरिक रूपों को नई पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास भी इस पहल के जरिए किया जा रहा है।

योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.cgculture.in पर उपलब्ध है। राज्य सरकार का मानना है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती, उसे केवल अवसर और प्रोत्साहन की आवश्यकता होती है और यह छात्रवृत्ति उसी दिशा में एक ठोस कदम है।

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