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: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को दूध और फल न देने पर लिया संज्ञान, जनहित याचिका में शुरू की सुनवाई

admin Wed, Nov 13, 2024

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को दूध और फल न देने के मामले में स्वतः संज्ञान लिया है और इसे जनहित याचिका के रूप में सुनना शुरू कर दिया है। मंगलवार को, मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव के शपथपत्र और अदालत के आयुक्तों की रिपोर्ट के बीच तुलनात्मक अध्ययन करने का निर्देश दिया। दरअसल, दुर्ग जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को दूध और फल न दिए जाने की खबर मीडिया में आने के बाद हाईकोर्ट ने इस पर ध्यान दिया और इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की खंडपीठ ने इस मामले के लिए अधिवक्ता अमिय कान्त तिवारी, सिद्धार्थ दुबे, आशीष बैक और ईशान वर्मा को अदालत आयुक्त नियुक्त किया। इन आयुक्तों ने आंगनबाड़ी केंद्रों का दौरा किया और वहां की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया, जिसके बाद अपनी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की। जांच के दौरान, संबंधित अधिकारियों ने अदालत आयुक्तों को बताया कि फल और दूध की जगह पौष्टिक आहार दिया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के संबंधित अधिकारी से शपथपत्र के साथ जवाब मांगा था। राज्य के मुख्य सचिव और अन्य अधिकारियों को इस मामले में पक्षकार बनाया गया। इसके कुछ समय बाद ही, सूरजपुर, कवर्धा और बस्तर से भी इसी तरह की समस्या सामने आई। आयुक्तों ने इन जगहों का भी दौरा किया और रिपोर्ट तैयार की। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ में सुनवाई के दौरान, अदालत में उपस्थित आयुक्त से महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव द्वारा प्रस्तुत शपथपत्र की उनके द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के साथ तुलना करने के लिए कहा गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अदालत के आदेशों का पालन हो रहा है या नहीं। हाईकोर्ट का यह कदम बच्चों के पोषण और उनके स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। अदालत का ध्यान इस ओर केंद्रित होने से सरकार पर भी बच्चों के पोषण और उनके स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों को लेकर जवाबदेही बनी रहेगी।

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