CG Board Exam 2027 : 10वीं-12वीं के हजारों छात्रों की बढ़ सकती है परेशानी, टीचर्स एसोसिएशन ने CM को लिखा पत्र
बिलासपुर : छत्तीसगढ़ में कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं को लेकर नया विवाद सामने आया है। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 से परीक्षा केंद्रों के निर्धारण में बदलाव के निर्देश दिए जाने के बाद शिक्षक संगठन ने विरोध शुरू कर दिया है। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने इस व्यवस्था को ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए परेशानी बढ़ाने वाला बताते हुए इसे तत्काल रोकने की मांग की है। इस संबंध में संगठन ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और माध्यमिक शिक्षा मंडल के अधिकारियों को पत्र लिखा है।
परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था में क्या होगा बदलाव?
जानकारी के अनुसार, माध्यमिक शिक्षा मंडल के सचिव ने 15 अक्टूबर 2026 को आयोजित वर्चुअल बैठक में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को परीक्षा केंद्रों के निर्धारण के संबंध में नए निर्देश दिए थे। इसके तहत सत्र 2026-27 से हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी बोर्ड परीक्षाओं के लिए विद्यार्थियों के अपने विद्यालय के बजाय अन्य नजदीकी विद्यालयों में परीक्षा केंद्र निर्धारित किए जाने हैं।
इस व्यवस्था पर छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में ऐसी व्यवस्था लागू करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है, लेकिन ग्रामीण, वनांचल और अनुसूचित क्षेत्रों में विद्यार्थियों को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
5 से 8 किलोमीटर तक बढ़ सकती है दूरी
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में अभिभावक बच्चों का दाखिला नजदीकी स्कूलों में कराते हैं, ताकि उन्हें पढ़ाई के लिए दूर न जाना पड़े। प्रदेश के कई इलाकों में विद्यार्थी पहले ही तीन से चार किलोमीटर पैदल चलकर विद्यालय पहुंचते हैं।
संगठन ने आशंका जताई है कि परीक्षा केंद्र बदलने से कई विद्यार्थियों को मौजूदा दूरी के मुकाबले पांच से आठ किलोमीटर अतिरिक्त सफर करना पड़ सकता है। दूरस्थ गांवों में सार्वजनिक परिवहन की सीमित उपलब्धता के कारण परीक्षा केंद्र तक समय पर पहुंचना मुश्किल हो सकता है। इससे विद्यार्थियों की परीक्षा में अनुपस्थिति बढ़ने की आशंका भी जताई गई है।
छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता
शिक्षक संगठन ने ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों की छात्राओं की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया है। संगठन के अनुसार, कई गांव जंगलों से घिरे हुए हैं और कुछ क्षेत्रों में जंगली जानवरों की आवाजाही भी रहती है। ऐसे इलाकों में परिवहन के पर्याप्त साधन नहीं होने से छात्राओं को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में अतिरिक्त परेशानी हो सकती है।
प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा का कहना है कि विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई क्षेत्रों में लगभग पांच किलोमीटर की दूरी पर हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी विद्यालय स्थापित किए गए हैं। ऐसे में परीक्षा के लिए दूसरे विद्यालयों में भेजने से विद्यार्थियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
पिछले सत्र में भी कई विद्यार्थी परीक्षा में नहीं हुए शामिल
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने पिछले सत्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि कक्षा 10वीं में कुल 3,21,677 विद्यार्थी पंजीकृत थे, जिनमें से 3,16,730 परीक्षा में शामिल हुए। वहीं, कक्षा 12वीं में 2,45,785 परीक्षार्थियों में से 2,43,010 विद्यार्थी परीक्षा में उपस्थित हुए।
संगठन का कहना है कि यदि परीक्षा केंद्रों की दूरी बढ़ाई जाती है, तो परीक्षा में शामिल नहीं हो पाने वाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ सकती है। हालांकि, इन आंकड़ों के आधार पर अनुपस्थिति की वजह परीक्षा केंद्रों की दूरी ही थी, ऐसा निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से व्यवस्था यथावत रखने की मांग
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा के साथ प्रदेश संयोजक सुधीर प्रधान, वाजिद खान, प्रदेश उपाध्यक्ष देवनाथ साहू, प्रवीण श्रीवास्तव, शैलेंद्र यदु, संजय उपाध्याय, मुकेश मुदलियार, डॉ. कोमल वैष्णव, प्रदेश सचिव मनोज सनाढ्य और प्रदेश कोषाध्यक्ष शैलेंद्र पारीक ने परीक्षा केंद्रों की मौजूदा व्यवस्था बनाए रखने की मांग की है।
संगठन ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, माध्यमिक शिक्षा मंडल के अध्यक्ष और सचिव सहित संबंधित अधिकारियों से छात्रहित में निर्णय लेने की अपील की है। एसोसिएशन का कहना है कि परीक्षा केंद्र तय करते समय विद्यार्थियों की सुविधा, भौगोलिक परिस्थितियों और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि दूरी या परिवहन की समस्या के कारण कोई भी विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा से वंचित न रहे।
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