10th August 2026

BREAKING NEWS

स्पॉ सेंटर की आड़ में चल रहा था देह व्यापार का खेल, मैनेजर और महिला दलाल समेत 9 गिरफ्तार

राहुल द्रविड़ के बाद VVS लक्ष्मण क्यों नहीं बने टीम इंडिया के कोच? पूर्व बल्लेबाज ने खोला बड़ा राज

छत्तीसगढ़ में 12 अगस्त को रहेगी सरकारी छुट्टी, स्कूल-कॉलेज समेत ये संस्थान रहेंगे बंद

रायपुर में आज भव्य तिरंगा यात्रा, इंडोर स्टेडियम में उमड़ा जनसैलाब

असम में बाढ़ का कहर... मृतकों की संख्या 100 पहुंची, कई जिलों में हालात अब भी गंभीर

Advertisment

केज कल्चर से मछली पालन बना रोजगार का जरिया, सरभोंका जलाशय में बढ़ा उत् : केज कल्चर से मछली पालन बना रोजगार का जरिया, सरभोंका जलाशय में बढ़ा उत्पादन

छत्तीसगढ़ के सरभोंका जलाशय में केज कल्चर तकनीक से मछली उत्पादन में बड़ा उछाल आया है। यहां के मछुआरों को इस आधुनिक पद्धति से अच्छा मुनाफा हो रहा है। जलाशय में सालाना 1600 मीट्रिक टन से अधिक मछली उत्पादन हो रहा है, जिससे न सिर्फ मछुआरों की आमदनी बढ़ी है, बल्कि राज्य में मत्स्य पालन को भी नई दिशा मिली है।

क्या है केज कल्चर फिश फार्मिंग?

केज कल्चर मछली पालन की एक उन्नत तकनीक है, जिसमें पानी के भीतर स्टील या प्लास्टिक के जाल से बने केज (पिंजरे) में मछली पाली जाती है। इससे मछलियों की तेजी से वृद्धि होती है और उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।

कैसे बढ़ रहा है मुनाफा?

  • जलाशय में उन्नत नस्ल की मछलियों का पालन किया जा रहा है, जिससे बाजार में मांग और दाम दोनों बढ़े हैं।

  • राज्य सरकार द्वारा मत्स्य पालकों को सब्सिडी और तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

  • केज कल्चर से पारंपरिक मत्स्य पालन की तुलना में तीन गुना ज्यादा उत्पादन हो रहा है।

स्थानीय मछुआरों को लाभ

सरभोंका जलाशय में इस तकनीक को अपनाने से सैकड़ों मछुआरों को स्थायी रोजगार मिला है। इससे जलाशय क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।

सरकार की योजना

छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य केज कल्चर तकनीक से मछली उत्पादन को 2025 तक 2500 मीट्रिक टन तक बढ़ाना है। इसके लिए राज्य के अन्य जलाशयों में भी यह तकनीक अपनाने की योजना बनाई जा रही है।

केज कल्चर तकनीक से मछली पालन छत्तीसगढ़ के लिए ब्लू रिवोल्यूशन (मत्स्य क्रांति) की ओर एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है, जिससे मछुआरों का भविष्य उज्ज्वल हो रहा है।

विज्ञापन

जरूरी खबरें

विज्ञापन