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कोरोना का नया वैरिएंट जेएन.1 : क्या पुरानी वैक्सीन अभी भी आपकी रक्षा कर पाएगी?

admin Mon, Jun 2, 2025

नई दिल्ली। देश में एक बार फिर कोरोना संक्रमण के मामले धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, देश में इस समय करीब 3,961 सक्रिय मामले हैं। हालांकि मरीजों की संख्या पहले जैसी गंभीर नहीं है, लेकिन लोगों के मन में यह सवाल जरूर उठ रहा है — क्या 2021-22 में ली गई कोरोना वैक्सीन हमें आज के नए वैरिएंट से भी बचा पाएगी?

जेएन.1: ओमिक्रॉन का नया चेहरा

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में कोरोना वायरस के चार वैरिएंट सक्रिय हैं, जिनमें सबसे ज़्यादा चर्चा में है — जेएन.1। यह वैरिएंट ओमिक्रॉन का एक सब-वैरिएंट है, जो सिंगापुर और हांगकांग जैसे देशों में तेजी से फैल रहा है। भारत में भी इसके मामले मिले हैं, लेकिन राहत की बात यह है कि इसकी गंभीरता कम पाई गई है

AIIMS के प्रोफेसर डॉ. संजय राय के अनुसार, “जेएन.1 कोई नया वायरस नहीं है। इसके लक्षण बेहद हल्के हैं, यह आम सर्दी-जुकाम जितना या उससे भी हल्का हो सकता है।”

पुरानी वैक्सीन बनाम नया वैरिएंट

कोविशील्ड, कोवैक्सीन और स्पुतनिक जैसी वैक्सीनें 2021 के शुरुआती वायरस स्ट्रेन के लिए बनाई गई थीं। विशेषज्ञ मानते हैं कि आज के म्यूटेटेड वैरिएंट पर इनका प्रभाव सीमित है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अविनाश भोंडवे के अनुसार, “जिन्होंने दो डोज़ के साथ बूस्टर डोज़ भी ली है, उन्हें कुछ हद तक सुरक्षा मिली है। संक्रमण हो भी जाए, तो लक्षण मामूली रह सकते हैं।”

वहीं नागपुर मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ डॉक्टर डॉ. अविनाश गावंडे का मानना है कि हर साल नए वैरिएंट के लिए नई वैक्सीन बनाना ज़रूरी है, ठीक वैसे जैसे हर साल फ्लू शॉट लिया जाता है।

क्या फिर से आएगी कोरोना की लहर?

डॉक्टरों का मानना है कि नई लहर की संभावना इस बार कम है, क्योंकि—

  1. ज़्यादातर लोग टीकाकरण करवा चुके हैं।

  2. वैरिएंट की गंभीरता बेहद कम है।

  3. संक्रमित व्यक्ति को लक्षण तक महसूस नहीं होते।

हालांकि बुजुर्ग, छोटे बच्चे और पहले से बीमार लोग अभी भी जोखिम में हैं और उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतने की ज़रूरत है।


क्या करें? – 5 जरूरी सावधानियां

  1. हल्के लक्षण भी नजर आएं तो टेस्ट कराएं।

  2. संक्रमित हों तो मास्क पहनें और आइसोलेशन में रहें।

  3. भीड़भाड़ से बचें और हाथ साफ रखें।

  4. डॉक्टर की सलाह से बूस्टर डोज़ लेने पर विचार करें।

  5. बुजुर्गों और कमजोर रोगियों की विशेष देखभाल करें।


नतीजा: टीका पूरी सुरक्षा नहीं, लेकिन राहत जरूर

कोरोना के खिलाफ पुरानी वैक्सीन एक ढाल की तरह तो हैं, लेकिन अब वो लोहे की नहीं, लकड़ी की ढाल बन चुकी है — कुछ वार रोक सकती हैं, लेकिन हर बार नहीं। आने वाले महीनों में सतर्कता और विज्ञान के बीच संतुलन बनाए रखना ही हमारी असली वैक्सीन होगी।

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