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: ग्वालियर में बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए शहर में बनेगा दूसरा शहरी वन

admin Sat, Nov 9, 2024

देश में बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण कई क्षेत्रों में वायु की गुणवत्ता खराब हो रही है, और ग्वालियर भी इस लिस्ट में शामिल हो चुका है। दिवाली के दौरान ग्वालियर के विभिन्न इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 300 के पार चला गया था। इन परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन भी चिंतित है और इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए अहम कदम उठाने का फैसला किया है। अब, ग्वालियर के सीरोल पहाड़ी की तरह, अलापुर पहाड़ी पर भी एक शहरी वन बनाने का निर्णय लिया गया है, जिससे पर्यावरण को बचाने में मदद मिलेगी।

ग्वालियर के तेजी से बढ़ते शहरीकरण और नई बिल्डिंग्स के निर्माण के कारण पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। बड़े-बड़े कंक्रीट के जंगल उभर रहे हैं, जिससे पेड़ों की संख्या घट रही है और वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। दिवाली के दौरान ही ग्वालियर में लगभग 30 हजार नए वाहन सड़कों पर आए, जिससे प्रदूषण और बढ़ने की आशंका है। इन परिस्थितियों में प्रशासन ने अलापुर पहाड़ी पर सीरोल पहाड़ी की तरह शहरी वन बनाने का निर्णय लिया है। ग्वालियर प्रशासन और वन विभाग की साझेदारी ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने इस परियोजना के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि जल्द ही अलापुर पहाड़ी पर वृक्षारोपण का कार्य शुरू किया जाएगा। यह वृक्षारोपण एक सुनियोजित योजना के तहत किया जाएगा, जिसमें सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों का भी सहयोग लिया जाएगा। वन विभाग के डीएफओ अंकित पांडे के अनुसार, "किसी भी पौधे को पेड़ बनने के लिए कम से कम दो वर्षों तक उसकी देखभाल करना आवश्यक है। इस दौरान उसे समय पर पानी और खाद की आवश्यकता होती है। हालांकि, यदि क्षेत्र में हरियाली हो, तो पौधे जल्दी विकसित होते हैं, लेकिन यह क्षेत्र की मिट्टी पर भी निर्भर करता है। दो साल बाद ये बड़े पौधे अपने स्थान पर स्वावलंबी हो जाते हैं।" सीरोल पहाड़ी पर पहला शहरी वन ग्वालियर में पहला शहरी वन सीरोल पहाड़ी पर स्थापित किया गया था, जिसे ग्वालियर हाई कोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक ने अपनी पहल से शुरू किया। उनके नेतृत्व में इस पहाड़ी पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया गया, और कुछ वर्षों में यह पहाड़ी घने पेड़ों से हरी-भरी हो गई। अब, इस उदाहरण को देखते हुए प्रशासन ने अलापुर पहाड़ी पर भी शहरी वन बनाने का निर्णय लिया है। ग्वालियर की वायु गुणवत्ता ग्वालियर में वायु गुणवत्ता की बात करें तो, राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न क्षेत्रों में AQI का स्तर सामान्य से खराब श्रेणी में है। शुक्रवार के ताजे आंकड़ों के अनुसार, यह स्थिति और भी गंभीर है। प्रदूषण और लोगों की सेहत ग्वालियर के प्रदूषण का स्तर लोगों के स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बन चुका है। यहाँ के निवासी हवा में मिल रहे प्रदूषण को अपने फेफड़ों में भरने को मजबूर हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि लोग जागरूक हों और अस्पतालों से ऑक्सीजन लेने के बजाय पेड़ लगाकर शुद्ध ऑक्सीजन लें। यह न सिर्फ आम लोगों के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि पर्यावरण को भी संरक्षित रखने में मदद करेगा। ग्वालियर में शहरी वन परियोजना से न केवल प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि यह एक स्थायी समाधान भी साबित होगा। लोगों को इस दिशा में सक्रिय रूप से योगदान देना चाहिए और पेड़-पौधों की देखभाल में अपना योगदान देना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध हवा मिल सके।

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