Robot Monk : इस देश में लॉन्च हुआ दुनिया का पहला Robot Monk, अब रोबोट करेगा भक्ति और ध्यान
Media Yodha Desk Sat, May 9, 2026
Robot Monk: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोट्स का इस्तेमाल अब सिर्फ फैक्ट्री, ऑफिस या घरों तक सीमित नहीं रह गया है. अब तकनीक आध्यात्म और धर्म की दुनिया में भी कदम रख चुकी है. दक्षिण कोरिया की राजधानी Seoul में एक बौद्ध मंदिर ने दुनिया के सामने अपना पहला ह्यूमनॉइड Robot Monk पेश किया है जिसका नाम Gabi रखा गया है. यह रोबोट सिर्फ दिखावे के लिए नहीं बनाया गया, बल्कि इसे बौद्ध परंपराओं और आध्यात्मिक एक्टिविटी में शामिल करने की तैयारी की जा रही है. Gabi को हाल ही में बुद्ध जयंती समारोह से पहले आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में पहली बार सार्वजनिक रूप से पेश किया गया.
पुराने भिक्षु की तरह दिखा Gabi
करीब चार फीट लंबे इस ह्यूमनॉइड रोबोट को पारंपरिक बौद्ध भिक्षुओं जैसे भूरे और ग्रे रंग के कपड़े पहनाए गए थे. समारोह के दौरान Gabi ने अन्य भिक्षुओं के साथ मंत्रोच्चार किया पूजा के समय झुककर प्रणाम किया और लोगों के सवालों के जवाब भी दिए. इस रोबोट को दक्षिण कोरिया के सबसे बड़े बौद्ध संगठन Jogye Order की पहल के तहत तैयार किया गया है. इसका मकसद युवाओं को आधुनिक तकनीक के जरिए बौद्ध धर्म और आध्यात्म से जोड़ना बताया जा रहा है.
रोबोट ने लिया आध्यात्मिक संकल्प
Gabi को चीन के Unitree G1 ह्यूमनॉइड प्लेटफॉर्म पर तैयार किया गया है. इसकी बॉडी इस तरह डिजाइन की गई है कि यह इंसानों की तरह चल सके, हाथ जोड़ सके और धार्मिक एक्टिविटी में हिस्सा ले सके. समारोह के दौरान एक भिक्षु ने जब Gabi से पूछा कि क्या वह बुद्ध और उनकी शिक्षाओं का पालन करेगा तो रोबोट ने जवाब दिया, “हां, मैं खुद को समर्पित करूंगा.” इसके बाद Gabi ने पूजा के दौरान पगोडा के चारों ओर चक्कर लगाए और हाथ जोड़कर प्रार्थना भी की. रोचक बात यह है कि Gabi नाम भी आध्यात्मिक अर्थ रखता है. बताया जा रहा है कि यह नाम गौतम बुद्ध के जन्म नाम सिद्धार्थ और कोरियाई शब्द जाबी यानी दया और करुणा को मिलाकर बनाया गया है.
रोबोट के लिए बनाए गए खास नियम
मंदिर प्रशासन ने Gabi के लिए कुछ विशेष बौद्ध नियम भी तैयार किए हैं. इनमें जीवन का सम्मान करना, किसी चीज को नुकसान न पहुंचाना, गलत बातें न कहना और जरूरत से ज्यादा बैटरी चार्ज न करना जैसे नियम शामिल हैं. दिलचस्प बात यह है कि इन नियमों को तैयार करने में AI चैटबॉट्स जैसे ChatGPT और Gemini की भी मदद ली गई.
क्यों बढ़ रहा है धर्म में AI का इस्तेमाल?
दक्षिण कोरिया में बौद्ध संस्थाएं अब नई पीढ़ी को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए तकनीक का सहारा ले रही हैं. धार्मिक संगठनों का मानना है कि AI और रोबोट्स की मदद से युवा वर्ग को आध्यात्मिक गतिविधियों से जोड़ना आसान हो सकता है. साथ ही भिक्षुओं की कमी जैसी समस्याओं से निपटने में भी यह तकनीक मदद कर सकती है. बताया जा रहा है कि आने वाले बुद्ध जयंती कार्यक्रमों और लालटेन परेड में Gabi दूसरे बौद्ध थीम वाले रोबोट्स के साथ नजर आ सकता है.
जापान में भी शुरू हो चुका है ऐसा प्रयोग
दक्षिण कोरिया अकेला ऐसा देश नहीं है जहां AI को आध्यात्म से जोड़ा जा रहा हो. कुछ समय पहले जापान के Kyoto University के शोधकर्ताओं ने Buddharoid नाम का AI रोबोट तैयार किया था. यह रोबोट लोगों से बातचीत कर सकता है, बौद्ध धर्मग्रंथों को समझ सकता है और आध्यात्मिक सवालों के जवाब भी दे सकता है. इन प्रयोगों को देखकर साफ है कि आने वाले समय में तकनीक और आध्यात्म का मेल और ज्यादा गहरा हो सकता है.
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