: सुप्रीम कोर्ट ने मनीष सिसोदिया को दी जमानत, संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला
admin Fri, Aug 9, 2024
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता मनीष सिसोदिया को
2021-22 की एक्साइज पॉलिसी में कथित अनियमितताओं से जुड़े दोनों मामलों में जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि उन्हें जल्दी सुनवाई की उम्मीद में जेल में रखना उनके मौलिक अधिकारों का हनन होगा। अदालत ने कहा कि अब समय आ गया है, जब अदालतों को यह महसूस करना चाहिए कि जमानत नियम है और जेल अपवाद।कोर्ट ने सिसोदिया को सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा अलग-अलग जांचे जा रहे मामलों में नियमित जमानत दी,
जिससे 17 महीने बाद उनकी रिहाई का मार्ग प्रशस्त हुआ। कोर्ट ने सिसोदिया को ₹10 लाख का बेल बॉन्ड और दो जमानतदार पेश करने का निर्देश दिया, साथ ही उनका पासपोर्ट जमा करने और हफ्ते में दो बार जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने का आदेश दिया। कोर्ट ने ED की उस मांग को खारिज कर दिया जिसमें सिसोदिया को दिल्ली सचिवालय , या मुख्यमंत्री कार्यालय जाने से रोकने का अनुरोध किया गया था, जैसा कि अरविंद केजरीवाल के मामले में किया गया था , जब उन्हें राष्ट्रीय चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत दी गई थी।न्यायमूर्ति बीआर गवई और केवी विश्वनाथन की पीठ ने अभियोजन पक्ष के उस अनुरोध को खारिज कर दिया ,
जिसमें सिसोदिया को ट्रायल कोर्ट से जमानत मांगने का निर्देश देने की मांग की गई थी। कोर्ट ने माना कि ट्रायल में देरी और लंबी कैद के कारण सिसोदिया के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है , और कहा कि एक नागरिक को तेज न्याय का अधिकार है। अदालत ने पाया कि ED और CBI के इस तर्क में कोई दम नहीं है ,कि सिसोदिया ने अपनी 'फ्रिवोलस' याचिकाओं के कारण ट्रायल में देरी की।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लगभग 69,000 पेज के दस्तावेजों की जांच की जानी है , और निष्पक्ष ट्रायल के हित में आरोपियों को कुछ समय मिलना चाहिए। सिसोदिया को फरवरी 2023 में अब खत्म हो चुकी एक्साइज पॉलिसी को लागू करने , की साजिश में उनकी कथित भूमिका के लिए गिरफ्तार किया गया था,जिसके तहत निजी खुदरा विक्रेताओं को फायदा पहुंचाने के लिए कमीशन दरों को 5% से बढ़ाकर 12% कर दिया गया था।
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