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: RBI MPC बैठक दिसंबर 2024: रेपो रेट पर निर्णय और आर्थिक दृष्टिकोण का इंतजार

admin Thu, Dec 5, 2024

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक का समापन शुक्रवार को होगा। सुबह 10 बजे RBI गवर्नर शक्तिकांत दास रेपो रेट पर निर्णय और देश की आर्थिक स्थिति को लेकर अपने अनुमानों की घोषणा करेंगे।

रेपो रेट पर क्या हो सकता है फैसला?

ज्यादातर विश्लेषकों का मानना है कि रेपो रेट को 6.5% पर 11वीं बार स्थिर रखा जाएगा। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ 25 बेसिस पॉइंट (bps) की मामूली कटौती की संभावना भी देख रहे हैं। इसके अलावा, यह अनुमान लगाया जा रहा है कि वित्तीय बाजार में तरलता (लिक्विडिटी) बढ़ाने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं, जैसे कैश रिज़र्व रेशियो (CRR) में कटौती या ओपन मार्केट ऑपरेशन्स (OMOs) की घोषणा।

दिसंबर 2024 की मौद्रिक नीति में मुख्य बिंदु

रेपो रेट और मौद्रिक नीति पर RBI MPC का रुख इस बार के निर्णय का सबसे महत्वपूर्ण पहलू होगा। निवेशक CRR में किसी भी बदलाव और केंद्रीय बैंक की अर्थव्यवस्था पर राय पर करीबी नजर रखेंगे।

वर्तमान ब्याज दरें और उनकी भूमिका

  • रेपो रेट: 6.5% (फरवरी 2023 से अपरिवर्तित)
  • कैश रिज़र्व रेशियो (CRR): 4.5%
  • स्टैच्युटरी लिक्विडिटी रेशियो (SLR): 18%

रेपो रेट का महत्व

रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को उनकी अल्पकालिक जरूरतों के लिए ऋण देता है।

CRR और SLR की भूमिका

  • CRR: बैंकों को अपनी कुल जमा राशि का एक निश्चित हिस्सा नकद के रूप में RBI के पास रखना होता है।
  • SLR: बैंकों को अपनी जमा राशि का एक हिस्सा सोने, नकद, या सरकार द्वारा स्वीकृत प्रतिभूतियों के रूप में रखना होता है।
रेपो रेट, CRR और SLR में कटौती से बाजार में तरलता बढ़ती है।
  • रेपो रेट में कटौती: कर्ज सस्ता हो जाता है।
  • CRR और SLR में कटौती: बैंकों को अधिक ऋण देने के लिए धनराशि उपलब्ध होती है।

आने वाले समय पर नजर

रेपो रेट का निर्णय MPC की छह सदस्यीय समिति द्वारा मतदान से तय होता है, जबकि CRR और SLR पर अंतिम फैसला RBI लेता है। दिसंबर 2024 की इस नीति से जुड़े फैसले बाजार में वित्तीय स्थिरता और विकास को बढ़ावा देने की दिशा तय करेंगे।

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