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: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कोर्ट कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग के संपादन और अपलोडिंग पर लगाया प्रतिबंध

admin Wed, Nov 6, 2024

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कोर्ट कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग को संपादित कर इंटरनेट पर अपलोड करने पर तुरंत प्रतिबंध लगा दिया है। मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ ने सोमवार को एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया। एक वकील ने बताया कि हाईकोर्ट के इस फैसले का उद्देश्य कोर्ट कार्यवाही की पवित्रता और पारदर्शिता को बनाए रखना है।

इस मामले के याचिकाकर्ता, दमोह के सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. विजय बजाज ने कहा, "मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 2021 में न्यायिक कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग के लिए नियम बनाए थे, जिनमें लाइव स्ट्रीमिंग के कॉपीराइट्स हाईकोर्ट के पास ही सुरक्षित हैं। इन नियमों के तहत लाइव स्ट्रीमिंग का मनमाने ढंग से उपयोग, साझा करना, अनुवाद करना या किसी भी प्लेटफॉर्म पर अपलोड करना प्रतिबंधित है। इसके बावजूद कई इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म पर लाइव स्ट्रीमिंग को संपादित कर आर्थिक लाभ उठाया जा रहा है।" हाईकोर्ट ने कहा कि इन नियमों के अनुसार, कोर्ट कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग को किसी भी सोशल मीडिया या टेलीविजन प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने से पहले अदालत से अनुमति लेना अनिवार्य है। इसके बावजूद सोशल मीडिया कंपनियों के कारण न्याय प्रणाली का मज़ाक बन रहा है, क्योंकि व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य सोशल प्लेटफार्मों पर 'मीम्स', 'रील्स', 'शॉर्ट्स' के रूप में लाइव कोर्ट कार्यवाही का दुरुपयोग हो रहा है। अदालत ने इस मामले में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, मेटा, यूट्यूब, X और अन्य मीडिया प्लेटफार्मों को चार हफ्तों के भीतर जवाब देने के लिए कहा है। याचिकाकर्ता के वकील मुकेश अग्रवाल ने बताया कि हाईकोर्ट ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्मों पर संपादित वीडियो क्लिप्स को हटाने और उनकी कमाई को भी वसूलने की मांग की है। इस निर्णय का उद्देश्य न केवल न्याय प्रणाली की गरिमा को बनाए रखना है बल्कि अदालत की कार्यवाहियों की लाइव स्ट्रीमिंग को गलत तरीके से प्रस्तुत करने से रोकना भी है।

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