INDIA ऑपरेशन सिंदूर : पाकिस्तान को भारतीय सेना का करारा जवाब, अब अमेरिका से गुहार लगा रहा पड़ोसी देश
भारत की सैन्य कार्रवाई के बाद पाकिस्तान में मची खलबली, मंत्री ने अमेरिका से मांगे एडवांस हथियार
नई दिल्ली/इस्लामाबाद।
भारतीय सेना द्वारा हाल ही में अंजाम दिए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने पाकिस्तान को उसकी हरकतों की ऐसी सज़ा दी है, जिसे वह आने वाले वर्षों तक याद रखेगा। इस ऑपरेशन के तहत भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए पीओके और पाकिस्तान में मौजूद 9 से अधिक आतंकी लॉन्चपैड्स को ध्वस्त किया। इसके बाद पाकिस्तानी सेना की तरफ से की गई जवाबी कार्रवाई में भी भारत ने पलटवार करते हुए 11 पाक सैन्य ठिकानों को बर्बाद कर दिया। भारतीय सेना की इस सटीक और मजबूत प्रतिक्रिया से पाकिस्तान बुरी तरह हिल गया है।
भारतीय वायुसेना की रणनीतिक सटीकता, दुश्मन को नहीं मिला जवाब देने का मौका
ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने जो साहसिक कार्रवाई की, वह केवल सैन्य कौशल नहीं बल्कि रणनीतिक चतुराई का उदाहरण थी। अत्याधुनिक ब्रह्मोस मिसाइलों, सुखोई फाइटर जेट्स और विशेष कमांडो दस्तों की मदद से भारतीय सेना ने ना सिर्फ आतंक के अड्डों को समाप्त किया, बल्कि दुश्मन को यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अब ‘पहले हमला ना सही, लेकिन जवाब घातक देगा।’ रावलपिंडी, मुजफ्फराबाद और नूर खान एयरबेस जैसे महत्वपूर्ण ठिकानों को टारगेट बनाकर भारतीय वायुसेना ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत की सीमा में घुसपैठ की कोई भी कोशिश अब महंगी पड़ेगी।
पाकिस्तान का दोहरा चेहरा: एक तरफ झूठा प्रोपेगैंडा, दूसरी तरफ अमेरिकी हथियारों की भीख
जहां पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ देश में यह प्रचार कर रहे हैं कि पाकिस्तान ने भारत को युद्ध विराम के लिए मजबूर किया, वहीं उनके ही मंत्री मुसादिक मलिक अमेरिका में जाकर एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम और लड़ाकू विमान मांग रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में मलिक यह स्वीकार करते नजर आ रहे हैं कि भारत 80 विमानों और 400 मिसाइलों के साथ आया था, जिनमें से कई परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम थीं। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान के पास कोई एयर डिफेंस सिस्टम न होता तो वे ‘मलबे के नीचे दब जाते’। यह कबूलनामा पूरी दुनिया के सामने पाकिस्तान की सैन्य कमजोरी की पोल खोलता है।
भारत की कूटनीतिक चाल: अमेरिका और दुनिया को दी सटीक जानकारी
भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद केवल सैन्य नहीं, बल्कि कूटनीतिक मोर्चे पर भी सफलता पाई है। शशि थरूर के नेतृत्व में भारत का एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका भेजा गया, जिसने अमेरिकी सांसदों और अधिकारियों को भारत पर हुए आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई की ब्रीफिंग दी। वहीं, पाकिस्तान ने भी बिलावल भुट्टो की अगुवाई में एक टीम भेजी, जो अमेरिकी अधिकारियों से सहायता मांग रही है। भारत की रणनीतिक पकड़ और आतंक के खिलाफ स्पष्ट नीति के सामने पाकिस्तान की स्थिति हास्यास्पद प्रतीत होती है।
आतंक पर चुप्पी और सेना को फील्ड मार्शल का दर्जा: पाकिस्तान की सच्चाई
भारत पर आतंकी हमले करवाने वाले गुटों पर कार्रवाई की बजाय पाकिस्तान ने अपनी सेना के प्रमुख आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल बना दिया। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि इस्लामाबाद की प्राथमिकता शांति नहीं, बल्कि सैन्य मर्दानगी का भ्रम फैलाना है। ऑपरेशन सिंदूर ने न केवल आतंक के ढांचे को हिला दिया है, बल्कि पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर बेनकाब कर दिया है। भारत ने साफ कर दिया है कि यदि कोई देश आतंक का समर्थन करेगा, तो उसे उसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।
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