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: दिवाली से पहले महंगाई का बाजार पर असर, राशन खरीदना हुआ मुश्किल

admin Sat, Oct 19, 2024

दिवाली के पहले ही महंगाई ने बाजार में आग लगा दी है। प्याज की कीमतें ₹60 प्रति किलो तक पहुंच गई हैं, जबकि टमाटर पहले से ही ₹100 प्रति किलो बिक रहा है। इसी के साथ आटा और दालों की कीमतों में भी जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है, जिससे त्योहारों के इस मौसम में लोगों के लिए राशन खरीदना चुनौती बन गया है।

दालों और आटे की कीमतों में भारी बढ़ोतरी दालों की कीमतें अब ₹170 से ₹180 प्रति किलो तक पहुंच गई हैं, जबकि कुछ समय पहले ये ₹150 से कम थीं। इसी तरह, आटे के 5 किलो पैकेट की कीमत ₹180 से ₹230 के बीच हो गई है, जिससे सिर्फ कुछ हफ्तों में आटे की कीमत में 30% तक का इजाफा हुआ है। प्याज की कीमतें ₹60 प्रति किलो और आलू ₹40 प्रति किलो तक पहुंच गए हैं, जबकि पखवाड़े भर पहले आलू की कीमत ₹20 प्रति किलो थी। सब्जियों में स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होने वाली लहसुन की कीमत अब ₹400 प्रति किलो तक पहुंच गई है। दिहाड़ी मजदूरों पर महंगाई की मार

राशन की दुकानों पर आने वाले लोग, खासकर दिहाड़ी मजदूर, अब दालें खरीदने से परहेज कर रहे हैं। पहले वे कीमतें पूछते हैं और फिर वस्तुओं की मात्रा तय करते हैं। महंगाई का सीधा असर गरीब और निम्न वर्ग के लोगों पर पड़ा है, जो अब आवश्यक खाद्य वस्तुओं को भी सीमित मात्रा में खरीद रहे हैं।

त्योहारी सीजन में बढ़ती महंगाई से लोग परेशान महंगाई के कारण लोग सीमित मात्रा में ही राशन खरीद रहे हैं, जिससे उन्हें अपनी जरूरतों के साथ समझौता करना पड़ रहा है। वहीं, निम्न वर्ग के लोगों ने महंगाई की वजह से राशन खरीदना लगभग बंद ही कर दिया है। जैसे-जैसे दिवाली नजदीक आ रही है, खाद्यान्नों की कीमतों में और वृद्धि देखी जा रही है, जो आम जनता के लिए परेशानी का सबब बन गई है। सरकार और प्रशासन से राहत की उम्मीद

त्योहारी सीजन में महंगाई से जूझ रहे लोगों को अब सरकार और प्रशासन से राहत की उम्मीद है। आम जनता चाहती है कि जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में स्थिरता लाई जाए, ताकि त्योहारों का आनंद बिना किसी आर्थिक बोझ के उठाया जा सके।

इस बढ़ती महंगाई ने जहां लोगों के बजट को प्रभावित किया है, वहीं उनके त्योहार की तैयारी पर भी असर डाला है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में स्थिति में सुधार होगा और बाजार में आवश्यक वस्तुओं की कीमतें सामान्य स्तर पर लौटेंगी।

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