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अमेरिका से चीन होते हुए लश्कर तक पहुँचे GoPro कैमरे : पहलगाम हमले में बड़ा खुलासा - NIA रिपोर्ट से सनसनी

Media Yodha Desk Mon, May 25, 2026

Pahalgam Attack: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। अमेरिका में निर्मित GoPro कैमरा, जिसे आधिकारिक रूप से चीन के एक अधिकृत वितरक को भेजा गया था, वह लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आतंकवादियों के पास कैसे पहुंच गया, इसकी जांच एजेंसी तेजी से कर रही है।

NIA के जांचकर्ताओं का मानना है कि यह मामला केवल एक कैमरे की सप्लाई चेन तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत-विरोधी ताकतों को सीमाओं के पार हाई-टेक उपकरण मुहैया कराने वाले अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को उजागर कर सकता है। दरअसल, पिछले साल जुलाई में दाचीगाम जंगलों में मुठभेड़ के दौरान मारे गए लश्कर आतंकियों के पास से बरामद उच्च गुणवत्ता वाले GoPro कैमरे ने इस पूरे प्रकरण को नई दिशा दी है। आतंकी संगठन अब हमलों को रिकॉर्ड कर दुष्प्रचार और मनोवैज्ञानिक युद्ध के लिए इन कैमरों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

GoPro कंपनी का बयान

NIA ने आधिकारिक तौर पर अमेरिकी कंपनी GoPro Inc. से संपर्क किया। कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में साफ बताया कि उक्त कैमरा चीन में स्थित अपने अधिकृत वाणिज्यिक वितरक को भेजा गया था। अब जांच एजेंसी इस बात का पता लगा रही है कि चीन से प्राप्त यह उपकरण लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों तक कैसे पहुंचा। जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि कैमरे पाकिस्तानी सेना द्वारा खरीदे गए होने और बाद में आतंकी संगठनों को सौंपे जाने की प्रबल आशंका है। बता दें कि भारत और चीन के बीच आपसी कानूनी सहायता संधि (MLAT) न होने के कारण यह मामला राजनयिक स्तर पर उठाया जा रहा है।

आरोपपत्र के बाद भी जांच जारी

NIA ने पहलगाम आतंकी हमले का विस्तृत आरोपपत्र दाखिल कर दिया है, जिसमें हमले के तात्कालिक परिचालन संबंधी तथ्य स्थापित किए गए हैं। हालांकि, उपकरण की खरीद और आपूर्ति शृंखला की जांच अभी भी चल रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि चीन से आयातित एक सामान्य व्यावसायिक उत्पाद जम्मू-कश्मीर में सक्रिय प्रतिबंधित आतंकी संगठन तक कैसे पहुंचा?

पहलगाम हमला और ऑपरेशन सिंदूर

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी। अधिकतर मृतक पर्यटक थे। इस हमले के बाद केंद्र सरकार ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान नियंत्रित क्षेत्रों में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को निशाना बनाया गया।

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