हैदराबाद : केसीआर को बेटी कविता का पत्र: तेलंगाना की सियासत में हलचल, बीजेपी-बीआरएस गठबंधन पर सवाल
तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) प्रमुख के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) को उनकी बेटी और एमएलसी कलवकुंतला कविता द्वारा लिखा कथित पत्र राजनीतिक हलकों में नई बहस और अटकलों का बाजार गर्म कर गया है। यह पत्र ऐसे समय पर सामने आया है जब बीआरएस की रजत जयंती बैठक के बाद पार्टी के अंदर और बाहर चर्चाओं का दौर तेज हो गया था।
📄 कविता का पत्र: क्या है मुद्दा?
यह पत्र कथित रूप से बीआरएस की रजत जयंती बैठक के संदर्भ में लिखा गया है, जिसमें कविता ने केसीआर के भाषण में बीजेपी पर कम हमले करने को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने लिखा,
"आपने उस पार्टी (बीजेपी) के बारे में सिर्फ दो मिनट बोले. कई लोगों को उम्मीद थी कि आप बीजेपी पर और जोरदार हमला करेंगे. निजी तौर पर, मुझे भी लगा कि आपको और ज़्यादा बोलना चाहिए था. मैं आहत हूं! शायद इसीलिए यह पत्र लिख रही हूं."
कविता ने यह भी कहा कि पार्टी के अंदर कई नेता बीजेपी को कांग्रेस के विकल्प के रूप में देख रहे हैं, और यह धारणा पार्टी के लिए नुकसानदेह हो सकती है।
📝 और क्या लिखा कविता ने?
कविता के पत्र में कई मुद्दों का उल्लेख है:
उर्दू भाषा, वक्फ बिल, एससी वर्गीकरण और बीसी आरक्षण जैसे मुद्दों पर चुप्पी
पुराने नेताओं को बार-बार जिम्मेदारी देना, जिससे युवा और नए कार्यकर्ता हाशिए पर हैं
जमीनी कार्यकर्ताओं के विचार सुनने के लिए पूर्ण अधिवेशन की जरूरत
केसीआर के संयमित लहजे की तारीफ, लेकिन रेवंत रेड्डी का नाम न लेने पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया
🔍 बीजेपी और कांग्रेस की प्रतिक्रिया
बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा:
"यह एक परिवार के आंतरिक मसले हैं. एक बेटी ने अपने पिता को पत्र लिखा, इसमें कोई बड़ी बात नहीं. बीआरएस जैसी परिवार-प्रेरित पार्टियां लोकतंत्र के लिए खतरा हैं."
उन्होंने कविता के पत्र को "संवाद की कमी और आंतरिक असंतोष" का संकेत बताया।कांग्रेस नेता आदि श्रीनिवास ने बीआरएस पर हमला बोलते हुए कहा:
"अगर केटीआर अपनी बहन कविता के आरोपों का जवाब नहीं दे सकते, तो उन्हें अन्य दलों पर टिप्पणी करने का कोई हक नहीं. यह पत्र बीआरएस के अंदर की सच्चाई उजागर करता है."
कोमाटिरेड्डी वेंकट रेड्डी और चमाला किरण कुमार रेड्डी जैसे कांग्रेस नेताओं ने इस पूरे मुद्दे को राजनीतिक ड्रामा बताते हुए खारिज कर दिया और बीआरएस-बीजेपी के गुप्त गठबंधन की ओर इशारा किया।
🤝 बीआरएस-बीजेपी गठबंधन की अटकलें क्यों?
कविता के पत्र में बीजेपी पर सीमित टिप्पणी और पार्टी के कुछ नेताओं की टिप्पणियों ने यह संकेत दिया कि क्या बीआरएस और बीजेपी के बीच गुप्त समझौता हो रहा है?
हाल ही में बीआरएस द्वारा एमएलसी चुनावों में बीजेपी को अप्रत्यक्ष समर्थन देने के आरोप भी लगे थे, जिससे बीजेपी-बीआरएस संभावित गठबंधन की अटकलें और तेज हो गई हैं।
🔎 BRS की चुप्पी: केटीआर क्या जवाब देंगे?
बीआरएस की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
केटीआर, जो बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष हैं, पर अब दबाव बढ़ रहा है कि वे अपनी बहन कविता के आरोपों और पार्टी की अंदरूनी स्थिति पर स्पष्ट बयान दें।
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