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चंद्रयान-3 का दुनियाभर में डंका : अमेरिका में ISRO को मिला अंतरिक्ष का सबसे बड़ा सम्मान

Media Yodha Desk Fri, May 22, 2026

नई दिल्ली : भारत के ऐतिहासिक चंद्रयान-3 मिशन ने एक बार फिर पूरी दुनिया में देश का मान बढ़ाया है। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहली बार सफल लैंडिंग कर इतिहास रचने वाले इस मिशन को अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोनॉटिक्स एंड एस्ट्रोनॉटिक्स (AIAA) ने '2026 गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स अवार्ड' से नवाजा है। 21 मई को वाशिंगटन डीसी में आयोजित एक खास समारोह में इस मिशन को अंतरिक्ष विज्ञान के इस सबसे बड़े सम्मान से सम्मानित किया गया।

ISRO की ओर से राजदूत विनय क्वात्रा ने लिया अवार्ड

AIAA ASCEND 2026 सम्मेलन के दौरान, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की तरफ से अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने यह अवार्ड स्वीकार किया। इस गौरवशाली अवसर पर राजदूत क्वात्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'स्पेस विजन 2047' की रूपरेखा पेश की। उन्होंने डीप स्पेस एक्सप्लोरेशन (गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण), मानव अंतरिक्ष मिशन और भारत के तेजी से उभरते कमर्शियल स्पेस सेक्टर की जानकारी दुनिया के सामने रखी। इसके साथ ही, उन्होंने अंतरिक्ष खोज के क्षेत्र में भारत और अमेरिका की सरकारों, उद्योगों और रिसर्च संस्थानों के बीच साझेदारी को और गहरा करने का आह्वान किया।

क्यों खास है चंद्रयान-3 की यह उपलब्धि?

23 अगस्त 2023 अंतरिक्ष जगत के लिए एक मील का पत्थर है। इसी दिन चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सॉफ्ट लैंडिंग की थी और ऐसा करने वाला यह दुनिया का पहला स्पेसक्राफ्ट बन गया था। चांद का यह हिस्सा वैज्ञानिक और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, जहां इससे पहले कभी सतह पर जाकर खोज नहीं की गई थी। इस मिशन ने न सिर्फ भविष्य के मानव मिशनों के लिए महत्वपूर्ण डेटा भेजा, बल्कि चांद की मिट्टी में कई अहम रसायनों की मौजूदगी की भी पुष्टि की। इन स्थानीय संसाधनों से भविष्य में चांद की सतह पर मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशन्स चलाने की संभावनाएं भी खुल गई हैं।

क्या है 'गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स अवार्ड'?

गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स अवार्ड AIAA द्वारा अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में शानदार उपलब्धियों के लिए दिया जाने वाला सबसे बड़ा और प्रतिष्ठित सम्मान है। यह पुरस्कार किसी खास व्यक्ति या टीम को दिया जाता है। इस पुरस्कार की शुरुआत श्रीमती गोडार्ड ने अपने पति रॉबर्ट एच. गोडार्ड की याद में की थी। रॉबर्ट गोडार्ड एक विजनरी, बेहतरीन इंजीनियर और लिक्विड रॉकेट इंजन के प्रणेता थे, जिनके शुरुआती प्रयोगों ने अंतरिक्ष विज्ञान की नींव रखी थी। साल 1975 में इंस्टीट्यूट ने इस पुरस्कार के चयन के दायरे को बढ़ाते हुए इसे इसका मौजूदा नाम और स्वरूप दिया था।

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