: हिमाचल प्रदेश: सीएम सुक्खू के रात्रि ठहराव परोसने में 'जंगली मुर्गा' विवाद, बीजेपी ने साधा निशाना
शिमला: हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार एक बार फिर विवादों में है। पहले समोसे की सीआईडी जांच और टॉयलेट टैक्स के मुद्दे ने सरकार को सुर्खियों में रखा, और अब मुख्यमंत्री के एक कार्यक्रम में जंगली मुर्गा परोसे जाने का मामला तूल पकड़ रहा है। यह विवाद इसलिए बड़ा है क्योंकि जंगली मुर्गा संरक्षित प्रजातियों में आता है और इसे मारने पर सख्त प्रतिबंध है।
क्या है पूरा मामला?
'सरकार जनता के द्वार' नामक कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला जिले के दूरस्थ कुपवी क्षेत्र का दौरा किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर जनता की समस्याओं को सुनना और समाधान करना है।- 13 दिसंबर को टिकरी गांव में मुख्यमंत्री ने पहली बार रात्रि ठहराव किया। उनके साथ स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल, स्थानीय नेता और अधिकारी भी मौजूद थे।
- इस दौरान मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से बातचीत की और उनकी समस्याओं पर ध्यान दिया।
बीजेपी का आरोप
बीजेपी नेताओं का कहना है कि सीएम के डिनर में जंगली मुर्गा परोसा गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।- वीडियो में मुख्यमंत्री और मंत्री धनीराम शांडिल को भोजन के लिए बैठे देखा जा सकता है।
- वीडियो में किसी व्यक्ति को यह कहते सुना जा सकता है कि डिनर में जंगली मुर्गा परोसा गया है।
- बीजेपी ने आरोप लगाया है कि यह घटना वन्यजीव संरक्षण कानून का उल्लंघन है। सरकार की सफाई
- वीडियो में दिख रहा है कि सीएम और उनके साथियों ने यह भोजन नहीं किया।
- यह भी दावा किया गया कि इस मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।
जंगली मुर्गे का संरक्षण
भारत में जंगली मुर्गा संरक्षित प्रजातियों में आता है। इसे मारने या शिकार करने पर कानूनन सख्त प्रतिबंध है।- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत जंगली पक्षियों का शिकार अपराध की श्रेणी में आता है।
- इस मामले को लेकर बीजेपी सरकार को कटघरे में खड़ा कर रही है।
पार्टी राजनीति तेज
- बीजेपी: इस मामले को लेकर बीजेपी सरकार पर हमलावर है और इसे जंगल संरक्षण कानून का उल्लंघन बता रही है।
- कांग्रेस: सत्तारूढ़ कांग्रेस ने आरोपों को निराधार बताया है और इसे राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया है।
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