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: श्रीलंका पहुंचे विदेश मंत्री एस. जयशंकर

admin Mon, Jun 24, 2024

विदेश मंत्री एस. जयशंकर गुरुवार को श्रीलंका पहुंचे

अपनी यात्रा के दौरान वे देश के शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठक करेंगे | जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूत बनाना है। कोलंबो पहुंचने पर जयशंकर का स्वागत राज्य मंत्री थारका बालासुरिया और पूर्वी प्रांत के गवर्नर सेंथिल थोंडामन ने किया।

 पड़ोस पहले और महासागर नीति पर जोर

जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि - उन्होंने अपने नए कार्यकाल की पहली यात्रा पर कोलंबो पहुंचने की सूचना दी। उन्होंने राज्य मंत्री थारका बालासुरिया और पूर्वी प्रांत के गवर्नर सेंथिल थोंडामन का गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए धन्यवाद दिया। जयशंकर ने लिखा कि श्रीलंका भारत की "पड़ोस पहले" और SAGAR (Security and Growth for All in the Region) नीतियों के केंद्र में है। यह जयशंकर की विदेश मंत्री के रूप में जून 11 को दूसरी बार पदभार संभालने के बाद श्रीलंका की पहली द्विपक्षीय यात्रा है।

पहली द्विपक्षीय यात्रा

जयशंकर पिछले हफ्ते इटली के अपुलिया क्षेत्र में आयोजित G-7 आउटरीच समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे। नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने कहा कि विदेश मंत्री श्रीलंका के नेतृत्व के साथ व्यापक बैठकों का आयोजन करेंगे। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के बाद विदेश मंत्री की पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी।

लाभप्रद सहयोग को मिलेगा गति

भारत की "पड़ोस पहले" नीति की पुष्टि करते हुए | यह यात्रा श्रीलंका के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। बयान में कहा गया है कि यह यात्रा कनेक्टिविटी परियोजनाओं और अन्य पारस्परिक लाभकारी सहयोग को कई क्षेत्रों में गति प्रदान करेगी।
शपथ ग्रहण समारोह में थे मौजूद
श्रीलंकाई राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे उन सात शीर्ष नेताओं में शामिल थे| जो 9 जून को राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्रिपरिषद के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए थे।
द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने का अवसर
जयशंकर की यह यात्रा भारत और श्रीलंका के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है। जयशंकर के इस दौरे से कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स, मरीटाइम सिक्योरिटी, और आर्थिक सहयोग में नए आयाम जुड़ने की संभावना है।
 क्षेत्रीय शांति और विकास में सहयोग
भारत और श्रीलंका  के बीच मजबूत संबंध क्षेत्रीय शांति और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जयशंकर की इस यात्रा से दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा | जिससे दक्षिण एशिया में स्थिरता और विकास के नए रास्ते खुलेंगे। भारत की "पड़ोस पहले" और SAGAR नीतियों के तहत यह यात्रा क्षेत्रीय समृद्धि और सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
 नये अवसरों की खोज
जयशंकर की यह यात्रा न केवल वर्तमान संबंधों को सुदृढ़ करेगी | बल्कि भविष्य में नई संभावनाओं और अवसरों की खोज के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी। इस यात्रा के दौरान होने वाली चर्चाओं और समझौतों से द्विपक्षीय संबंधों में एक नई ऊर्जा और दिशा मिलेगी | जिससे दोनों देशों के लोगों को लाभ होगा।
सकारात्मक और प्रभावी
इस यात्रा  कदमको एक सकारात्मक और प्रभावी कदम के रूप में देखा जा रहा है| जो भारत और श्रीलंका के बीच संबंधों को और गहरा करेगा। इस यात्रा से यह स्पष्ट होता है| कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को प्राथमिकता देता है | और उनके साथ मिलकर क्षेत्रीय विकास और सुरक्षा के लिए काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। जयशंकर की श्रीलंका यात्रा से द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाईयों पर ले जाने की उम्मीद है| जिससे दोनों देशों के लिए लाभप्रद परिणाम निकलेंगे। ग्रामीण बाजार में FMCG कंपनियों की नजर:

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