रायपुर के युवा किसान ने अपनी मेहनत से बड़ा मुकाम पाया है.एमबीए ग्रेजुए : एमबीए ग्रेजुएट किसान की कमाल की कहानी: अमरूद की खेती से पैदा किया ‘हरा सोना’
जहां कई लोग एमबीए करने के बाद कॉर्पोरेट की दौड़ में शामिल हो जाते हैं, वहीं एक युवक ने अपनी डिग्री को इस्तेमाल कर खेती को ही कमाई का ज़रिया बना लिया। आज वो न सिर्फ लाखों की कमाई कर रहे हैं, बल्कि खेती को लेकर युवाओं की सोच भी बदल रहे हैं।
🌱 कौन हैं ये किसान?
यह कहानी है एक एमबीए ग्रेजुएट किसान की, जिन्होंने पढ़ाई पूरी करने के बाद शहरों में नौकरी करने की बजाय अपने गांव लौटकर अमरूद की खेती शुरू की। शुरू में लोगों ने ताने मारे, लेकिन आज उनके खेतों से निकलता है ‘हरा सोना’ यानी प्रीमियम अमरूद, जिसकी मांग देशभर में है।
🍈 कैसे की शुरुआत?
खेती में आधुनिक तकनीकों और मार्केटिंग स्किल्स का उपयोग किया।
अमरूद की ताइवानी, लखनऊ सुपर और वीएनआर बीज किस्में लगाईं।
ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग और जैविक खाद का प्रयोग कर उत्पादन को बेहतर किया।
💰 कमाई के आंकड़े जानकर चौंक जाएंगे
शुरू में सिर्फ 2 एकड़ में खेती शुरू की।
अब 10+ एकड़ में अमरूद के बाग हैं।
हर सीजन में 10-12 लाख रुपये तक की कमाई।
लोकल मंडी के साथ-साथ ऑनलाइन और बड़े रिटेलर्स को भी सप्लाई।
📢 युवाओं को दिया प्रेरणा का संदेश
"खेती में अगर विज़न और प्लानिंग हो, तो यह किसी भी कॉर्पोरेट जॉब से कम नहीं है।"
वे अब वर्कशॉप और सोशल मीडिया के ज़रिए युवाओं को खेती की ट्रेनिंग दे रहे हैं, जिससे नई पीढ़ी खेती को लेकर उत्साहित हो रही है।
🌾 खेती + एजुकेशन = नई क्रांति
यह कहानी साबित करती है कि जब शिक्षा और परंपरा का संगम होता है, तो खेती भी एक प्रॉफिटेबल स्टार्टअप बन सकती है।
👏 ऐसे किसान देश की असली ताकत हैं, जो मिट्टी से सोना उगाना जानते हैं।
💡 शिक्षित युवा अगर खेती की ओर लौटे, तो भारत का गांव भी चमक उठेगा।
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