बस्तर पंडुम छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग की जनजातीय संस्कृति का भव्य उत्सव : बस्तर पंडुम क्या है? जिसमें शामिल हो रहे हैं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह – जानिए पूरी डिटेल्स
छत्तीसगढ़ के बस्तर की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत को दुनियाभर में पहचान दिलाने वाले आयोजन ‘बस्तर पंडुम’ की चर्चा इन दिनों जोरों पर है। खास बात यह है कि इस वर्ष के बस्तर पंडुम कार्यक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह खुद शामिल होने जा रहे हैं। तो आखिर क्या है ये 'बस्तर पंडुम'? आइए जानते हैं...
🌿 क्या है बस्तर पंडुम?
'बस्तर पंडुम' एक जनजातीय पारंपरिक उत्सव है, जो बस्तर अंचल की आदिवासी संस्कृति, परंपराएं और लोकजीवन को दर्शाता है।
‘पंडुम’ का मतलब होता है – उत्सव या पर्व।
यह उत्सव हर वर्ष विभिन्न जनजातीय समाजों द्वारा मनाया जाता है।
इसमें जनजातीय देवी-देवताओं की पूजा, पारंपरिक नृत्य, संगीत, शिकार उत्सव, और व्यंजन शामिल होते हैं।
🎉 उत्सव की खास बातें
आदिवासी परंपराओं की झलक: गोंड, मुरिया, मारिया, हल्बा, बत्रा, धुरवा जैसे समुदायों की परंपराएं दिखती हैं।
लोकनृत्य और संगीत: ढोल, मांदर, मोहरी की धुन पर पारंपरिक नृत्य प्रस्तुतियां।
पारंपरिक वेशभूषा और हथियारों की प्रदर्शनी।
स्थानीय हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों की प्रदर्शनी।
बस्तर की देवी-देवताओं की शोभायात्राएं और पूजा अनुष्ठान।
🏛️ केंद्रीय गृहमंत्री की मौजूदगी क्यों अहम?
अमित शाह की मौजूदगी से यह साफ है कि केंद्र सरकार बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर ले जाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
यह नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शांति, विकास और संस्कृति के सम्मान का प्रतीक बन रहा है।
इससे स्थानीय पर्यटन, हस्तशिल्प और रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
🌟 बस्तर पंडुम का उद्देश्य
जनजातीय समाज की पहचान और गौरव को बढ़ावा देना।
पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करना।
नवाचार और पारंपरिकता के संगम से बस्तर को नई पहचान देना।
विज्ञापन
जरूरी खबरें
विज्ञापन