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CG News : सरेंडर कर चुके नक्सली अब सिखाएंगे IED से निपटने की तकनीक, सुरक्षा बलों को मिलेगा बड़ा फायदा

Media Yodha Desk Thu, Apr 9, 2026

CG News : छत्तीसगढ़ में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए पुलिस ने एक अहम कदम उठाया है। अब सरेंडर कर चुके नक्सलियों की मदद से सुरक्षा बलों को इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) से निपटने की ट्रेनिंग दी जाएगी। इस पहल का उद्देश्य जवानों की ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाना और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। दरअसल, बस्तर क्षेत्र को हाल ही में माओवादी गतिविधियों से काफी हद तक मुक्त घोषित किया गया है। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए यह नई रणनीति अपनाई गई है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि पूर्व नक्सलियों के पास IED बनाने, छिपाने और इस्तेमाल करने का व्यावहारिक अनुभव है, जो सुरक्षा बलों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा।

काउंटर टेरर ट्रेनिंग में पूर्व नक्सलियों की भूमिका

बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पट्टिलिंगम के अनुसार, कांकेर स्थित काउंटर टेररिज्म एंड जंगल वॉरफेयर कॉलेज में प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए करीब 20 पूर्व माओवादी कैडर की पहचान की गई है। ये सभी पहले IED हैंडलिंग और ऑपरेशन में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं।इनका मुख्य काम जवानों को यह समझाना होगा कि जंगलों में IED कैसे तैयार किए जाते हैं, किन जगहों पर छिपाए जाते हैं और किस तरह ट्रिगर किए जाते हैं। इससे सुरक्षा बलों को फील्ड लेवल पर बेहतर समझ विकसित होगी।

IED खतरे से निपटने की कोशिश

बस्तर क्षेत्र में IED लंबे समय से सुरक्षा बलों और आम नागरिकों के लिए बड़ा खतरा रहा है। अक्सर ये विस्फोटक जमीन के अंदर या पेड़-पौधों के बीच छिपाकर लगाए जाते थे। पिछले वर्षों में कई जानलेवा हमले इसी वजह से हुए हैं। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2001 से मार्च 2026 तक बस्तर संभाग के सात जिलों—बस्तर, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर—में 4,607 IED बरामद किए गए, जबकि 1,280 विस्फोट की घटनाएं सामने आईं।

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