2500 फीट ऊंची पहाड़ी पर विराजित हैं माता हिंगलाज भवानी, 52 सिद्ध पीठों : 2500 फीट ऊंची पहाड़ी पर विराजित हैं माता हिंगलाज भवानी, 52 सिद्ध पीठों में से एक, यहां पहुंचना नहीं आसान
चैत्र नवरात्रि की महाअष्टमी के पावन अवसर पर माता हिंगलाज भवानी के दरबार में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। यह शक्तिपीठ न सिर्फ आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसकी भौगोलिक स्थिति भी बेहद चुनौतीपूर्ण है। माता का यह मंदिर 2500 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित है, और यहां तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कठिन चढ़ाई पार करनी होती है।
🔱 माता हिंगलाज भवानी: 52 सिद्ध शक्तिपीठों में से एक
हिंगलाज भवानी का यह मंदिर भारत-पाक सीमा के पास बलूचिस्तान (पाकिस्तान) में स्थित शक्तिपीठ हिंगलाज माता का ही एक रूप माना जाता है। मान्यता है कि यहां माता सती का ब्रह्मरंध्र (सिर का भाग) गिरा था, इसीलिए यह स्थान 52 सिद्ध शक्तिपीठों में शामिल है।
यह सिद्ध पीठ छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले की मनेन्द्रगढ़ घाटी में स्थित है।
घने जंगलों और दुर्गम रास्तों से होकर श्रद्धालु यहां माता के दर्शन को पहुंचते हैं।
पूरी चढ़ाई के दौरान माता के जयकारों और भक्ति गीतों की गूंज वातावरण को आध्यात्मिक बना देती है।
🚶♀️ यहां पहुंचना आसान नहीं, फिर भी नहीं रुकती आस्था
मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कई किलोमीटर लंबी पहाड़ी चढ़ाई करनी पड़ती है। रास्ते में कच्चे पथ, चट्टानें और जंगलों की कठिनाइयां भी आस्था की राह में बाधा नहीं बनतीं।
प्रशासन की ओर से रास्तों पर सुरक्षा और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था की जाती है।
कई श्रद्धालु नवरात्रि में नंगे पांव और व्रत रखते हुए माता तक पहुंचते हैं।
🌸 नवरात्रि पर विशेष आयोजन
चैत्र नवरात्रि के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना, भंडारा और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। महाअष्टमी के दिन कन्या पूजन और दुर्गा सप्तशती पाठ के साथ हजारों भक्त माता का आशीर्वाद लेने आते हैं।
🙏 श्रद्धा और शक्ति का प्रतीक
माता हिंगलाज भवानी का यह शक्तिपीठ श्रद्धा, भक्ति और आत्मबल का प्रतीक है। यहां की कठिन चढ़ाई न केवल शारीरिक परीक्षा है, बल्कि आध्यात्मिक दृढ़ता का भी प्रतीक बन चुकी है।
क्या आप भी कभी हिंगलाज भवानी के दर्शन करना चाहेंगे?
जय माता दी!
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