21st August 2026

BREAKING NEWS

बिलासपुर में महतारी वंदन योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा! सरकारी कर्मचारी भी ले रहे थे लाभ, अब होगी वसूली

सौरभ चंद्राकर ने जताया जान का खतरा, भारत लौटने से पहले मांगी सुरक्षा; सट्टा नेटवर्क के राज खोलने का दावा

वन विभाग में बड़े पैमाने पर तबादले, कई IFS अफसरों की बदली जिम्मेदारी; देखें पूरी लिस्ट

चमोली टनल हादसे में छत्तीसगढ़ के 4 मजदूरों की मौत, CM साय ने किया 5-5 लाख मुआवजे का ऐलान

1000 से अधिक विद्यार्थियों को दी साइबर सुरक्षा की जानकारी

Advertisment

प्री-Ph.D. प्रवेश प्रक्रिया में 8 महीने की देरी, ABVV के अभ्यर्थियों न : ABVV के अभ्यर्थियों ने की कार्रवाई की मांग

Media Yodha Desk Fri, Aug 21, 2026

बिलासपुर : अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर द्वारा प्री-Ph.D. प्रवेश 2026 परीक्षा हेतु सूचना जनवरी माह 2026 में जारी की गई थी, लेकिन लगभग आठ माह बीत जाने के बाद भी प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो सकी है। अभ्यर्थियों का कहना है कि अभी तक न तो परीक्षा से संबंधित प्राप्त आपत्तियों का विधिवत निराकरण किया गया है और न ही प्री-Ph.D. परीक्षा का परिणाम जारी किया गया है। इस संबंध में विश्वविद्यालय के कुलपति महोदय तथा अपर संचालक, उच्च शिक्षा विभाग बिलासपुर के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर शीघ्र कार्रवाई की मांग की गई है। अभ्यर्थियों ने बताया कि इतनी लंबी अवधि तक प्रवेश प्रक्रिया लंबित रहने के कारण परीक्षा में शामिल छात्र-छात्राओं में अत्यधिक निराशा एवं असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

आरक्षण रोस्टर को लेकर भी स्पष्टता की मांग-
अभ्यर्थियों ने प्री-Ph.D. प्रवेश संबंधी सूचना में आरक्षण व्यवस्था को लेकर भी स्पष्टता की मांग की है। उनका कहना है कि बैकलॉग सीटों में आरक्षण का वर्गीकरण प्रदर्शित किया गया है, जबकि DET 2026 की सीटों में आरक्षण रोस्टर का स्पष्ट वर्गीकरण दिखाई नहीं देता। प्रथम दृष्टया यह स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण अभ्यर्थियों के बीच आरक्षण संबंधी नियमों तथा प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
अभ्यर्थियों ने मांग की है कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस विषय में स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करे तथा राज्य शासन एवं विश्वविद्यालय में लागू आरक्षण नियमों के अनुरूप पूरी प्रक्रिया की आवश्यक जांच कर स्थिति स्पष्ट की जाए।
**चूंकि आरक्षण रोस्टर एवं प्रक्रिया में निष्पक्षता को लेकर पूर्व में भी आपत्तियां आयी है जिससे कुछ वर्ष तक phd प्रवेश प्रक्रिया बंद रही थी। (प्रोफेसर होता case 2016-17)

परीक्षा केंद्रों की व्यवस्थाओं पर भी उठे कई सवाल -
परीक्षा के दौरान निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर व्यवस्थाओं को लेकर भी अभ्यर्थियों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। शासकीय बिलासा गर्ल्स कॉलेज तथा शासकीय साइंस कॉलेज, बिलासपुर में परीक्षा निर्धारित समय से विलंब से प्रारंभ होने की बात सामने आई। अभ्यर्थियों के अनुसार प्रश्नपत्रों को क्रमवार व्यवस्थित नहीं किए जाने तथा परीक्षा व्यवस्था पर्याप्त रूप से सुदृढ़ नहीं होने के कारण परीक्षा प्रारंभ होने में देरी हुई।
अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच किए जाने पर यह तथ्य सामने आ सकता है कि बिलासा गर्ल्स कॉलेज में परीक्षा के शुरुआती लगभग 15-20 मिनट के दौरान कुछ विद्यार्थियों को अलग विषय के प्रश्नपत्र वितरित कर परीक्षा प्रारंभ कर दी गई थी। विद्यार्थियों द्वारा आपत्ति किए जाने के बाद प्रश्नपत्र एवं OMR शीट बदले गए। इस पूरे मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।

मॉडल आंसर में त्रुटियों को लेकर आपत्तियां -
परीक्षा के बाद जारी मॉडल आंसर में भी कई विषयों को लेकर अभ्यर्थियों द्वारा आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। केमिस्ट्री विषय के मॉडल आंसर में सेट-C के शुरुआती 50 प्रश्नों के सही उत्तरों के स्थान पर सेट-A के उत्तर प्रदर्शित किए जाने की त्रुटि की ओर विश्वविद्यालय का ध्यान आकर्षित कराया गया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि उक्त आपत्ति सही पाई जाती है तो संशोधित उत्तर कुंजी जारी किया जाना आवश्यक है, लेकिन अब तक इस संबंध में कोई स्पष्ट सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई है।
इसी प्रकार पॉलिटिकल साइंस विषय में कई प्रश्नों एवं उनके उत्तरों के चयन को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। कंप्यूटर साइंस एवं अर्थशास्त्र विषय के प्रश्नों में भी अभ्यर्थियों द्वारा विभिन्न त्रुटियों की ओर ध्यान आकर्षित कराया गया है।
अभ्यर्थियों ने मांग की है कि सभी विषयों में प्राप्त आपत्तियों का निष्पक्ष रूप से विषय विशेषज्ञों के माध्यम से परीक्षण कराया जाए।

शोधार्थियों का अमूल्य समय हो रहा प्रभावित-
अभ्यर्थियों ने कहा कि पीएचडी से संबंधित प्रवेश एवं अन्य प्रक्रियाओं में लगातार देरी का सीधा प्रभाव युवा शोधार्थियों के शैक्षणिक भविष्य पर पड़ रहा है।
विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की गई है कि पीएचडी सहित सभी विषयों में प्रवेश प्रक्रिया से लेकर शोध कार्य, परीक्षा, मूल्यांकन एवं अंतिम परिणाम तक की प्रत्येक प्रक्रिया का पूर्व निर्धारित एवं स्पष्ट शेड्यूल जारी किया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की देरी एवं अनिश्चितता की पुनरावृत्ति हो।

UGC के मानकों के अनुरूप सुपरवाइजर नियुक्ति की भी मांग-
अभ्यर्थियों ने शोधार्थियों के लिए सुपरवाइजर निर्धारित किए जाने की प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि सुपरवाइजर बनाए जाने के दौरान UGC द्वारा निर्धारित मानकों एवं संबंधित नियमों का नियमानुसार पालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। यदि इस प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं होता है तो भविष्य में शोधार्थियों के कोर्स वर्क एवं शोध कार्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
*अभ्यर्थियों का कहना है कि इस संबंध में कई छात्रों द्वारा विश्वविद्यालय के कुलसचिव महोदय से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखी गईं, लेकिन उन्हें स्पष्ट समाधान मिलने के बजाय संतोषजनक एवं स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। ऐसे में छात्रों में असमंजस एवं निराशा की स्थिति बनी हुई है।

स्थायी समाधान और जल्द परिणाम जारी करने की मांग-
अभ्यर्थियों ने कुलपति महोदय एवं उच्च शिक्षा विभाग से मांग की है कि प्री-Ph.D. प्रवेश परीक्षा से संबंधित सभी आपत्तियों का निष्पक्ष एवं विशेषज्ञों के माध्यम से शीघ्र निराकरण कराया जाए, आवश्यक होने पर संशोधित उत्तर कुंजी जारी की जाए तथा बिना किसी अनावश्यक विलंब के परीक्षा परिणाम घोषित कर आगे की प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण की जाए।
साथ ही परीक्षा केंद्रों पर सामने आई व्यवस्थागत कमियों, प्रश्नपत्र वितरण में हुई कथित त्रुटियों, आरक्षण रोस्टर की स्थिति तथा सुपरवाइजर नियुक्ति से संबंधित नियमों की भी निष्पक्ष जांच कर आवश्यकतानुसार जिम्मेदारी निर्धारित की जाए।
यूटीडी के छात्र नेताओं तथा अभ्यर्थियों का कहना है कि विश्वविद्यालय की प्रवेश एवं शोध प्रक्रिया में पारदर्शिता, समयबद्धता एवं जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए, विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा यदि इन समस्याओं का शीघ्र एवं स्थायी समाधान नहीं किया जाता है, तो छात्रों को लोकतांत्रिक एवं वैधानिक तरीके से आगे अपनी आवाज उठाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

विज्ञापन

जरूरी खबरें

विज्ञापन