बस्तर के जंगल में पुलिस का बड़ा ऑपरेशन : जमीन के भीतर मिला नक्सलियों का खजाना, AK-47 के साथ ड्रम में मिले सोने के बिस्किट
रायपुर: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग में सुरक्षा बलों के एंटी-नक्सल अभियानों के दौरान नक्सलियों के गुप्त ठिकानों से बड़ी मात्रा में सोना और हथियार बरामद किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में बस्तर के अलग-अलग इलाकों से करीब 8 किलो सोना जब्त किया जा चुका है। इनमें बड़ी संख्या में सोने के बिस्कुट शामिल हैं।
पुलिस की कार्रवाई में बीजापुर जिले के बासागुड़ा और कुटरू के अलावा दंतेवाड़ा के बारसूर जैसे दुर्गम इलाकों में जमीन के नीचे बनाए गए डंप का पता चला। इन गुप्त ठिकानों पर प्लास्टिक के ड्रमों और दूसरे बर्तनों में हथियार, नकदी और सोना छिपाकर रखा गया था। कुछ डंप से एके-47 जैसी राइफलों के साथ सोने के बिस्कुट भी बरामद किए गए हैं।
नोटबंदी के बाद सोने में बदल रहे थे नकदी
एंटी-नक्सल अभियान से जुड़े अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विवेकानंद के मुताबिक, नोटबंदी के अनुभव के बाद नक्सलियों ने बड़ी मात्रा में नकदी रखने के बजाय अपनी संपत्ति को सोने में बदलना शुरू किया। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि नक्सली सोने को ऐसी संपत्ति के रूप में देखते थे, जिसे जरूरत पड़ने पर आसानी से नकदी में बदला जा सकता है।
पुलिस को कुछ गुप्त डंप से पुराने 500 और 1000 रुपये के नोटों के बंडल भी मिले हैं। इससे संकेत मिलता है कि नक्सली नोटबंदी के दौरान अपनी पूरी नकदी को बदल नहीं पाए थे।
जमीन के नीचे बनाए जाते थे गुप्त डंप
जंगलों में नक्सलियों के गुप्त डंप काफी सावधानी से बनाए जाते थे। प्लास्टिक के ड्रमों और बर्तनों में हथियार, सोना और अन्य सामान भरकर उन्हें जमीन के नीचे छिपाया जाता था। सुरक्षा बलों को अभियान के दौरान ऐसे कई ठिकानों का पता चला है।
पुलिस के अनुसार, कुछ स्थानों पर एके-47 जैसी आधुनिक राइफलों के साथ सोने के बिस्कुट भी मिले हैं। पिछले दो वर्षों में बरामद करीब 8 किलो सोना इसी तरह के गुप्त डंप से मिलने की बात सामने आई है।
आत्मसमर्पण कर चुके कैडर्स से मिल रही मदद
जंगलों में बनाए गए सभी गुप्त डंप का पता लगाना सुरक्षा बलों के लिए आसान नहीं है। पुलिस के मुताबिक, कई ठिकानों की जानकारी नक्सली संगठन के चुनिंदा शीर्ष नेताओं और केंद्रीय समिति के सदस्यों तक ही सीमित थी। इनमें से कई नेता मारे जा चुके हैं।
अब सुरक्षा एजेंसियां आत्मसमर्पण कर चुके नक्सली कमांडरों और कैडर्स की मदद से इन गुप्त ठिकानों की जानकारी जुटा रही हैं। पुलिस पापा राव जैसे आत्मसमर्पण कर चुके स्पेशल जोनल कमेटी के कैडर्स से मिली जानकारी के आधार पर जंगलों में छिपाए गए अन्य डंप की तलाश कर रही है।
नकदी की जगह सोने से चलाते थे खर्च
पुलिस के अनुसार, कुछ मामलों में नक्सली अपने नेताओं या कैडर्स को खर्च के लिए नकदी के बजाय सोने के बिस्कुट भी देते थे। जरूरत पड़ने पर इन बिस्कुटों को बेचकर पैसा हासिल किया जाता था।
सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई के बीच अब इन गुप्त आर्थिक ठिकानों और हथियार डंप को नष्ट करने पर भी फोकस किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जंगलों में छिपाकर रखी गई संपत्ति और हथियारों की बरामदगी से नक्सली नेटवर्क की आर्थिक और लॉजिस्टिक व्यवस्था को समझने में मदद मिल रही है।
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